-हिंदू धर्म मानव जीवन जीने की एक कला : महंत रामप्यारे दास
गोसाईंगंज-अयोध्या 11 जनवरी (आरएनएस)। हम धन में भी श्रेष्ठ,बल में भी श्रेष्ठ और बुद्धि में भी श्रेष्ठ फिर गुलाम कैसे हो गए। क्योंकि हमारा धर्म गांव तक ही सीमित था।उक्त बातें विराट हिंदू सम्मेलन के दौरान श्री श्रृंगी ऋषि आश्रम पर मुख्य अतिथि के रूप में आए विश्व हिंदू परिषद के पूर्व संगठन मंत्री अवध प्रांत भूलेंद्र जी ने कही । अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यदि हमारे गांव के मंदिर को कोई क्षति पहुंचाता है तो हम लड़ते हैं ,गांव से दूर जब हिंदू धर्म पर आघात होता है तो हम मौन रहते हैं। क्योंकि हमारा धर्म गांव तक ही सीमित है। सोचनीय विषय है कि आज से 200 वर्ष पूर्व हम विश्व गुरु थे । हमें सोने की चिडिय़ा कहा जाता था, शिवाजी जैसे वीर योद्धाओं से हमारा देश भरा पड़ा था। फिर भी हम गुलाम हो गए, क्योंकि हमारा संगठन मजबूत नहीं था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामकुटीर के महंत रामप्यारे दास ने बताया कि हिंदू धर्म मानव जीवन जीने की एक कला है। पूरे विश्व में यदि कोई भी इंसान है तो उसकी जड़ सनातन ही है और यही सत्य है। जब से सृष्टि की उत्पत्ति हुई तब से लेकर आज तक जो भी मानव है उसकी जड़ सनातन से ही जुड़ी हुई है। श्रृंगी ऋषि आश्रम के पुजारी महेंद्र गोस्वामी, शीला त्रिपाठी और रमाकांत त्रिपाठी ने भी उपस्थित हिंदू जन समूह को संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विन्देश्वरी लाल श्रीवास्तव ने किया और संचालन रामबक्स सिंह ने किया। संयोजक विभूति सिंह ने बताया कि 500 से अधिक हिंदुओं ने खिचड़ी भोज का आनंद लिया। इस अवसर पर विनीत सिंह बिन्नू,आकाश सिंह, गजेंद्र पांडे, राम केवल यादव सैकड़ो सनातन धर्मी उपस्थित रहे।
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