अल्मोड़ा,11 जनवरी (आरएनएस)। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर आहूत उत्तराखंड बंद को उत्तराखंड लोक वाहिनी ने समर्थन दिया। लोक वाहिनी के नेताओं ने कहा कि इस प्रकरण में केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच तभी सार्थक होगी, जब पीडि़ता के माता-पिता की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की देखरेख में निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाए। लोक वाहिनी नेताओं ने कहा कि अनिल जोशी न तो पीडि़त हैं और न ही पीडि़ता के पक्षकार। अब तक उनकी अंकिता को न्याय दिलाने से जुड़े किसी भी आंदोलन में कोई सक्रिय भूमिका सामने नहीं आई है। ऐसे में यदि उनकी प्राथमिकी के आधार पर जांच कराई जाती है तो उसके किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने की संभावना नहीं है और अपराधियों के एक बार फिर बच निकलने का खतरा बना रहेगा। नेताओं ने कहा कि अनिल जोशी को भविष्य में सत्ता की चाटुकारिता के अनेक अवसर मिल सकते हैं, लेकिन उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़े इस संवेदनशील मामले में उन्हें इस तरह का हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उनके उस आश्वासन की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने अंकिता के माता-पिता से कहा था कि सरकार उनकी मांग पर सीबीआई जांच कराएगी। लोक वाहिनी ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसा किया जाता है तो प्रारंभिक रिपोर्ट में पीडि़ता के माता-पिता के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। उत्तराखंड लोक वाहिनी ने यह भी मांग की कि विशेष जांच टीम में जांच अधिकारी रही रेनुका देवी को सीबीआई की उस टीम में शामिल न किया जाए, जो इस प्रकरण की जांच करेगी। नेताओं का कहना था कि यदि रेनुका देवी को फिर से जांच में शामिल किया गया तो कथित वीआईपी का नाम कभी सामने नहीं आ पाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार द्वारा रेनुका देवी को सीबीआई में डेपुटेशन पर भेज दिया गया है। लोक वाहिनी नेताओं ने आंदोलनकारियों से अपील की कि आंदोलन पूरी तरह अहिंसक और शांतिपूर्ण रखा जाए, क्योंकि भाजपा सरकार आंदोलनों को दबाने और भटकाने के अवसर तलाशती रहती है। उत्तराखंड बंद के समर्थन में एडवोकेट जगत रौतेला, विशन दत्त जोशी, अजयमित्र सिंह बिष्ट, जंग बहादुर थापा, रेवती बिष्ट, पूरन चंद्र तिवारी, दयाकृष्ण कांडपाल, मुहम्मद हारिस और अजय मेहता सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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