-श्री गुरू वशिष्ठ गुरुकुल विद्यापीठ वेद पाठशाला में समारोह पूर्वक मनाई गई स्वामी विवेकानंद जयंती
अयोध्या 12 जनवरी (आरएनएस)। दृश्यते अनेन इति दर्शनम जिससे देखा जाए अथवा सत्य का दर्शन किया जाए वह दर्शन है”जैसा की उपनिषद् में वर्णित है, दर्शन वह ज्ञान है जो तत्व का दर्शन कराता हैं,उक्त विचार स्वामी विवेकानंद जयंती पर आयोजित संगोष्ठी “स्वामी विवेकानंद के नव्य वेदांत का शिक्षा में निहतार्थ में वक्ता के रूप में उपस्थित वेद के विद्वान शुक्ल यजुर्वेद के आचार्य अक्छय वी देवघर ने व्यक्त किए, कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर हुआ,गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने वेद मंत्र, सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया,पूर्व प्रधानाचार्य दु:ख हरण नाथ मिश्र ने कहा स्वामी जी द्वारा प्रतिपादित नव्य वेदांत में मुख्यता शिक्षक छात्र संबंधों में मधुरता, अनुशासन, विद्यालय का स्वरूप, शिक्षक के नैतिक कर्तव्य प्रमुखता से है, कार्यक्रम में प्रमुख वक्ताओं में वेद विद्वान शुक्ल यजुर्वेद के आचार्य आशुतोष त्रिपाठी, कृष्ण यजुर्वेद के विद्वान आचार्य शिवांकर जी,गुरुकुल के प्रधानाचार्य अथर्ववेद के आचार्य नीरज कुमार ओझा, वेद वेदांग गुरुकुल गाजियाबाद से आए ऋग्वेद विद्वान बृजेश कुमार मिश्रा, पश्चिम बंगाल से आए सामवेद के विद्वान आर्कंजन चटर्जी,वैदिक विद्वान अंकुर मिश्र रहे, कार्यक्रम में वैभव ब्रम्हचारी का एकल गीत तन समर्पित मन समर्पित ने उपस्थित श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया, संचालन सभा समिति के प्रधान मंत्री सौरभ ब्रम्हचारी ने धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष उत्कर्ष ब्रम्हचारी ने किया,कार्यक्रम में मुख्य रूप से गुरुकुल के निदेशक डॉ दिलीप सिंह, केंद्रीय कार्यालय प्रमुख गणित विज्ञान के आचार्य अंकुर मिश्र,अभिभावक उपस्थित थे।
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