सिरसा 14 जनवरी (आरएनएस)। स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर राजधानी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में राष्ट्रीय युवा दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित युवा संसद में देशभर से आए प्रतिभागियों ने पक्ष–विपक्ष की भूमिका निभाते हुए समसामयिक राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक और विचारोत्तेजक बहस की। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यों की समीक्षा भी प्रस्तुत की गई।कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, उच्च शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा एवं ऑनलाइन शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शिक्षाविद एवं समाजसेवी डॉ. अनिल धानुका ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि युवा ही राष्ट्र की रीढ़ हैं और शिक्षा वह माध्यम है, जो उन्हें आत्मनिर्भर, नवाचारी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाती है। आज आवश्यकता है कौशल-आधारित, तकनीक-सक्षम और सुलभ शिक्षा व्यवस्था की। डॉ. धानुका के प्रेरक विचारों को सुनकर सभागार तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा। उत्कृष्ट वक्तृत्व और विषय की गहराई के लिए उन्हें ‘बेस्ट वक्ताÓ के सम्मान से नवाजा गया।
इसी क्रम में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में भी स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर एक समारोह आयोजित हुआ, जहाँ समाजोपयोगी एवं दूरदर्शी विचारों के लिए डॉ. अनिल धानुका को सम्मानित किया गया। उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने शिक्षा के क्षेत्र में उनके सतत योगदान और युवाओं को प्रेरित करने के प्रयासों की सराहना की।
डॉ. धानुका ने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको—यह मंत्र आज के युवाओं के लिए पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। उन्होंने ऑनलाइन और हाइब्रिड शिक्षा मॉडल को ग्रामीण व दूरदराज़ क्षेत्रों तक पहुँचाने पर बल दिया, ताकि हर युवा को समान अवसर मिल सके।
राष्ट्रीय युवा दिवस पर शिक्षा को समर्पित यह आयोजन न केवल युवाओं में चेतना और नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करने वाला रहा, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही सशक्त भारत की आधारशिला है।
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