जौनपुर 15 जनवरी (आरएनएस)। शहर के मोहल्ला उर्दू बाजार स्थित दलेल खां इमाम बारगाह में हैदरी कमेटी के तत्वावधान में काबे में हुई अली मौला की विलादत के सिलसिले में जश्ने मौला अली का आयोजन किया गया।महफिल में शायरों ने अपने अपने कलामो को पेश कर ऐसा खूबसूरत समा बांधा कि वाहवाहीं के साथ नारे हैदरी या अली के नारे से महफिल गूंज उठी। महफिल का आगाज मौलाना सैयद दिलशाद हुसैन के द्वारा पढ़े गए हदीसे किस्सा से हुआ। जनाब मौलाना सैयद हसन अब्बास हायरी ने महफिल में मौला अली की काबे में हुई पैदाइश के सिलसिले में तकरीर की। मौला अली अलैहिस्सलाम की शान में पढऩे के सिलसिले की शुरुआत करते हुए अली एहरान ने पढ़ा मेरा मौला मेरा आका हैदरे कर्रार है,मुन्तजिर आज जिसकी काबे की दीवार है,रहमतें अल्लाह की बरसेंगी इसका है यकीं,जश्ने मौला के लिए मेरा सजा घर बार है, फैसला करते हैं ऐसा बस मेरे मौला अली,मानता वह भी है जो इस्लाम का गद्दार है,वक्त के इमाम को जिसने न पहचाना ,अली,वो तो बस जाहीलियत की मौत का हकदार है। शोहरत जौनपुरी ने पढ़ा जमीनों आसमां मंजर बा मंजर मुस्कुराते हैं, अली नाजिल हुए मेहराबों मेंबर मुस्कुराते हैं,हयाते दायमी काबे में पाई हुब्बे खालिक से,मिला है कुवते बाजू पैयंबर मुस्कुराते हैं,एहतेशाम जौनपुरी ने पढ़ा कह दो मरहब से ये सोच समझ कर आए,खून पीने को है तैयार अली की तलवार,निजामत के फरायज को अंजाम दे रहे जनाब मौलाना निसार हुसैन प्रिंस ने पढ़ा तलवार तो बहुत से गले पर चली मगर,ऐसे भी कुछ गले थे जो तलवार पर चले।जिसको सुनकर वाह वाही के साथ नारे हैदरी और या अली की सदा से पूरा वातावरण गूंजने के साथ ही खुशनुमा हो गया। इसके अलावा शायरों में आरिफ जौनपुरी, मुनाजिर सिवानी, शाहिद बनारसी, रशीद मिर्जापुर, साकिब चंदौलवी,शाहबाज खान रन्नवी, हेजान इनामपुरी, हसन फतेहपुरी, फैहमी इनामपुरी फरहान अली रन्नवी,आदि ने एक से बढ़कर एक अपने अपने कलामो को पेश किया। रिजवान हैदर, दिलशाद हुसैन, सरदार हुसैन बबलू, इरशाद जैदी तहसील अब्बास सोनी, जैन रिजवी, रजा हैदर रूमी गौहर रिजवी,शीबू,रियान अब्बास, मोहम्मद बिलाल जानी पत्रकार आदि मौजूद रहे।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

