40 दिन बाद भी एफआईआर विचाराधीन
आयुक्त के आश्वासन से आगे बढ़ेगा या फाइलों में ही दम तोड़ेगा न्याय
सुल्तानपुर 15 जनवरी (आरएनएस)। अयोध्या मण्डल के आयुक्त राजेश कुमार के एकदिवसीय दौरे पर जनता दर्शन में पहुँचे रविन्द्र कोरी (अनुसूचित जाति) निवासी ग्राम सैफुल्लागंज उम्मीद लेकर आए थे पर मिले फिर वही आश्वासन। आरोप है कि ऐनुल हक पुत्र मो0 वहीद समेत कुछ सरहंग व अपराधी किस्म के लोग सरकारी चैम्बर व नाली पर मिट्टी डालकर जबरन कब्जा कर रहे हैं और पड़ोस के अनुसूचित जाति के परिवारों को प्रताडि़त कर रहे हैं।
प्रश्न यह नहीं कि अपराध हुआ या नहीं। प्रश्न यह है कि 04.12.2025 से चला आ रहा प्रकरण आज तक थ्प्त् के दरवाज़े तक क्यों नहीं पहुँच पाया? स्थानीय पुलिस को प्रार्थना पत्र दिए जाने के बावजूद प्रथम सूचना अब तक फाइलों की चौखट पर ही अटकी है। क्या कानून की गाड़ी के पहिए दलदल में फँस गए हैं या फिर पीडि़त की जाति देखकर न्याय का ट्रैफिक सिग्नल लाल हो जाता है। रविन्द्र कोरी ने प्रार्थना पत्र में स्पष्ट लिखा है कि जान-माल को खतरा है ऊपर से साजिश रची जा रही है पर पुलिस की कलम में स्याही सूख गई है। जनता दर्शन में आयुक्त महोदय ने थ्प्त् दर्ज कराने का आश्वासन दिया और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश भी दिए। पर सवाल वही पुराना आदेश कागज़ पर या ज़मीन पर। यह मामला सिर्फ कब्जे का नहीं प्रशासनिक संवेदनहीनता का आईना है। जब अनुसूचित समाज को न्याय के लिए आयुक्त के दर तक दौड़ लगानी पड़े, तो नीचे की व्यवस्था किसके भरोसे? क्या पुलिस का काम शिकायत दर्ज करना नहीं या पहले अनुकूल माहौल बनाना ज़रूरी है। रविन्द्र कोरी की गुहार सीधी है थ्प्त् दर्ज हो, सुरक्षा मिले, कब्जा हटे। शासन से अपेक्षा है कि वह आश्वासन को आदेश और आदेश को कार्रवाई में बदले। वरना जनता दर्शन भी जन-आश्वासन बनकर रह जाएगा और न्याय हमेशा की तरह लाइन में खड़ा रहेगा।
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