शिमला/दिल्ली 16 Jan, (Rns) | हिमाचल प्रदेश सरकार के भीतर चल रहे ‘क्षेत्रवाद बनाम अफसरशाही’ के विवाद पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पहली बार चुप्पी तोड़ी है। दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों का बचाव किया और कहा कि मंत्रियों और अफसरों के बीच कोई बड़ा विवाद नहीं है। हालांकि, धरातल पर स्थिति इसके उलट है, जहाँ मंत्री और अधिकारी आमने-सामने हैं। विवाद की जड़: विक्रमादित्य सिंह का ‘यूपी-बिहार’ पोस्ट : यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यूपी और बिहार के कुछ आला IAS-IPS अधिकारी हिमाचल में ‘हिमाचलियत’ की धज्जियां उड़ा रहे हैं और वे जनसेवक के बजाय शासक बनने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इन अधिकारियों को समय रहते ‘निपटने’ की चेतावनी भी दी। सरकार में फूट और तीखी बयानबाजी : मंत्रियों में दरार: राजस्व मंत्री जगत नेगी और पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने विक्रमादित्य के बयान का विरोध किया। अनिरुद्ध सिंह ने यहाँ तक कह दिया कि अगर कोई मंत्री काम नहीं करवा पा रहा, तो यह उसकी कार्यशैली की कमी है।
अफसरों का विद्रोह : प्रदेश के IAS और IPS एसोसिएशन ने विक्रमादित्य के बयान की कड़ी निंदा की है। IPS एसोसिएशन ने तो सरकार से यहाँ तक मांग कर दी है कि वे विक्रमादित्य सिंह के साथ ड्यूटी नहीं करेंगे।
जगत नेगी का रुख : राजस्व मंत्री ने IPS एसोसिएशन के बयान को गलत बताया है और कहा है कि 19 जनवरी को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस गंभीर मसले पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
विक्रमादित्य का पलटवार : अपने विरोधियों को जवाब देते हुए विक्रमादित्य ने पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह पर पुराना हमला बोला और NHAI अधिकारियों के साथ हुई मारपीट (FIR मामला) की याद दिलाई। उन्होंने साफ किया कि वे टकराव नहीं चाहते, लेकिन प्रदेश के हितों से समझौता भी नहीं करेंगे।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

