मुंबई,16 जनवरी। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कमजोर हुआ है। आज (16 जनवरी) सुबह शुरुआती कारोबार में रुपया 10 पैसे टूटकर 90.44 के स्तर पर पहुंच गया। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 90.37 पर खुला था, लेकिन जल्द ही इसमें गिरावट देखी गई। पिछले कारोबारी दिन रुपया 90.34 पर बंद हुआ था। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मजबूत डॉलर की वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है।
रुपये की कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती मानी जा रही है। अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद डॉलर छह हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। बेरोजगारी भत्ते के नए दावे उम्मीद से कम रहे, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिला। इससे यह धारणा बनी कि अमेरिकी फेड जल्द ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा। मजबूत डॉलर का असर उभरती बाजारों की मुद्राओं पर साफ दिख रहा है।
रुपये पर दबाव बढऩे की एक और बड़ी वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली है। जनवरी महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने करीब 19,000 करोड़ रुपये की भारतीय इक्विटी बेच दी है। जब विदेशी निवेश बाहर जाता है, तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और शेयर बाजार का सकारात्मक माहौल रुपये की गिरावट को कुछ हद तक संभाल रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में रुपये की दिशा कई फैक्टर पर निर्भर करेगी। इनमें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति, विदेशी निवेश का रुख और व्यापार घाटे की स्थिति शामिल है। विश्लेषकों का मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपया 89.20 से 91.40 के दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार कर सकता है। जब तक विदेशी निवेश में सुधार नहीं होता, रुपये की मजबूती मुश्किल बनी रह सकती है।
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