उदयपुर ,17 जनवरी (आरएनएस)। झीलों की नगरी उदयपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक वीडियो सामने आया है। अंबामाता थानाधिकारी (स्॥ह्र) मुकेश सोनी एक कैफे के अंदर युवकों पर थप्पड़ और घूंसे बरसाते हुए नजर आए हैं। वीडियो में युवक रहम की गुहार लगाते हुए हाथ जोड़ रहे हैं, लेकिन पुलिसकर्मी मारपीट के साथ-साथ गालियां देते हुए दिखाई दे रहे हैं। क्या है पूरा मामला? यह मामला अंबामाता इलाके के सुभाष चौराहा क्षेत्र का है, जो 28 जुलाई 2025 की रात का बताया जा रहा है। वीडियो के अनुसार: थानाधिकारी मुकेश सोनी टीम के साथ गश्त पर थे। एक कैफे का शटर बंद था लेकिन अंदर से आवाजें आ रही थीं।
पुलिस ने शटर को लातें मारीं और जब पीछे के गेट से अंदर घुसे तो वहां मौजूद युवकों को पीटना शुरू कर दिया। पीडि़तों में सब्जी लेने गया सैटेलाइट अस्पताल का स्टाफ और कैफे के कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं।
सब्जी लेने आए थे साहब…
वीडियो में एक युवक पुलिस को अपनी सफाई देने की कोशिश कर रहा है। वह अपनी थैली दिखाते हुए कह रहा है कि उसके पास रोटी है और वह सिर्फ सब्जी लेने आया था। हालांकि, पुलिस ने उनकी एक न सुनी और मारपीट के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया। अगले दिन युवकों की जमानत हुई।
थानाधिकारी का पक्ष : विवाद बढ़ता देख अंबामाता थानाधिकारी मुकेश सोनी ने अपना पक्ष भी रखा है। उन्होंने बताया-यह इलाका काफी संवेदनशील (स्द्गठ्ठह्यद्बह्लद्ब1द्ग) है। कैफे संचालक की लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि देर रात तक वहां असामाजिक तत्व आते हैं। उस दिन शटर बंद था और पुलिस के कहने के बावजूद उसे नहीं खोला गया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी।
सवालिया निशान
वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में रोष है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या देर रात कैफे खुला होने पर पुलिस को मारपीट और गालियां देने का कानूनी अधिकार है? क्या पुलिस को शांतिपूर्वक कार्रवाई के बजाय बल प्रयोग का सहारा लेना चाहिए था?
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