नई दिल्ली ,18 जनवरी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने संबंधी बयानों के विरोध में ग्रीनलैंड में बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला है। शनिवार को सैकड़ों प्रदर्शनकारी राजधानी नूक की सड़कों पर उतरे और अमेरिका के संभावित कब्जे के दावों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई स्वयं ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने की। प्रदर्शनकारी हाथों में ग्रीनलैंड के झंडे और बैनर लिए अमेरिकी कॉन्सुलेट की ओर मार्च करते नजर आए। प्रदर्शन के दौरान साफ संदेश दिया गया कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला ग्रीनलैंड के लोग खुद करेंगे।
प्रदर्शनकारियों का मार्च उस नए निर्माणाधीन परिसर के पास से भी गुजरा, जहां अमेरिका अपने कॉन्सुलेट को स्थानांतरित करने की योजना बना रहा है। फिलहाल अमेरिकी कॉन्सुलेट एक लाल रंग की लकड़ी की इमारत में संचालित हो रहा है, जहां केवल चार कर्मचारी तैनात हैं।
ट्रंप का दावा—अमेरिकी सुरक्षा के लिए अहम है ग्रीनलैंड
राष्ट्रपति ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और वहां मौजूद विशाल खनिज संसाधन अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ट्रंप यह भी कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी सप्ताह डेनमार्क के अनुरोध पर कुछ यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सैन्य कर्मियों की तैनाती की है, जिससे हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं।
हृ्रञ्जह्र सहयोगियों के बीच बढ़ा तनाव
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के बार-बार दिए गए बयानों से अमेरिका और डेनमार्क के बीच राजनयिक तनाव गहराता जा रहा है। दोनों देश हृ्रञ्जह्र के संस्थापक सदस्य हैं। ट्रंप के रुख की यूरोप भर में तीखी आलोचना हो रही है। करीब 57 हजार की आबादी वाला ग्रीनलैंड लंबे समय तक कोपेनहेगन से शासित रहा है। वर्ष 1979 के बाद से इसे व्यापक स्वायत्तता मिली है, लेकिन यह अब भी डेनमार्क का हिस्सा है। रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क के अधीन है और प्रशासनिक खर्च का बड़ा हिस्सा भी वही वहन करता है।
स्टीफन मिलर के बयान से बढ़ा विवाद
व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ (पॉलिसी) स्टीफन मिलर के बयान ने विवाद को और हवा दे दी। फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम ‘हैनिटीÓ में मिलर ने कहा कि डेनमार्क ग्रीनलैंड की रक्षा करने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा, किसी इलाके पर नियंत्रण के लिए जरूरी है कि आप उसकी रक्षा कर सकें, उसे बेहतर बना सकें और वहां स्थायी रूप से मौजूद रह सकें—डेनमार्क इन तीनों कसौटियों पर विफल रहा है।
डेनमार्क का जवाब—हृ्रञ्जह्र की मौजूदगी होगी मजबूत
डेनमार्क ने स्पष्ट किया है कि वह ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए हृ्रञ्जह्र की स्थायी और मजबूत मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। इसी क्रम में यूरोपीय देशों ने सीमित संख्या में सैनिक वहां तैनात किए हैं। ग्रीनलैंड के लोगों और नेताओं में चिंता जरूर है, लेकिन उन्होंने डेनमार्क के साथ एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया है।
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