सागर द्वीप/कोलकाता 19 जनवरी (आरएनएस)। तमाम दावों व संसाधनों के बाद आज के इस युग में भी गंगासागर व कुम्भ मेले में लोग लापता हो जाते हैं। इस साल भी तमाम सरकारी चुस्ती के बाद भी हजारों लोग गंगासागर मेले में अपनों से अलग होकर लापता हुए। अपने घरों से सैंकड़ों या फिर हजारों किलोमीटर दूर लापता पुण्यार्थियों का रोना कलपना किसी को भी व्यथित कर देने वाला था। ऐसे में उक्त लापता पुण्यार्थियों की संकट मोचक की भूमिका में बजरंग परिषद दिखी। गंगा सागर मेले में एक सौ साल से भी अधिक समय से सेवा कार्य करने वाली संस्था बजरंग परिषद के ‘बजरंगी सिपाहीÓ मोक्ष नगरी गंगासागर में लापता हुए पुण्यार्थियों के संकटमोचक बने। यहां परिषद की विशाल सेवा शिविर लापता पुण्यार्थियों का आश्रय बनी। बजरंग परिषद मेले में आये लापता पुण्यार्थियों को उनके परिजनों से मिलवाने का कार्य करती है। परिषद के सेवा मंत्री सचिव प्रेम नाथ दुबे ने आज बताया कि, देश के विभिन्न भागों से आए मात्र 5224 पुण्यार्थी अपने परिजनों से बिछड़े पुण्यार्थियों में बिहार, यूपी, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, हरियाणा, राजस्थान व गुजरात सहित पूरे देश भर आए लोग थें। प्रेम नाथ दुबे व प्रधान सचिव हरि नारायण दुबे ने बताया कि, परिजनों से बिछड़े पुण्यार्थियों में 5201 को उनके परिजनों से मिलवा दिया गया। जबकि बचे 23 लोगों को कोलकाता लाया गया और कलाकार स्ट्रीट स्थित मैढ क्षत्रिय धर्मशाला में रखा गया व फिर उन्हें रेल, वाहन और अन्य साधनों के द्वारा उनके घर भेजा गया। शिविर में लापता पुण्यार्थियों ने मीडिया कर्मियों के साथ बातचीत में कहा कि, बजरंग परिषद के ‘बजरंगी सिपाहियोंÓ ने जिस तरह से हजारों किलोमीटर दूर हमलोगों की संकटमोचक बनी यह हम लोगों के लिए स्मरणीय है और हम लोग इस सेवा को जीवन में नहीं भूल पाएगें। उक्त शिविर में मनोज चांदगोठिया, विकास राव, विक्रम दुबे, सहित अन्य मौजूद रहें।

