फिर बज उठा सिंगूर की जमीं से बंगाल में सियासत का बिगुल
जगदीश यादव
कोलकाता 20 जनवरी (आरएनएस)। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हुगली जिले के सिंगूर में एक सभा कर सिंगूर में 830 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया किया था। लेकिन पीएम के उक्त कार्यक्रम के मात्र 48 घंटे भी हुए कि, अब सिंगूर में ही बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की सभा का ऐलान आज कर दिया गया है। ऐसे में राजनीति के जानकारों का मानना है कि, विधनसभा चुनाव 2026 के अधिकारिक तारीख के ऐलान के पहले ही बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण नाम सिंगूर से राजनीतिक घमासान का आगाज लगभग हो गया है। हुगली जिले के सिंगूर में बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की सभा इसी माह 28 तारीख को होगा। इस सभा की मुख्य जिम्मेदारी राज्य के मंत्री व सिंगूर में किसान आन्दोंलन का एक चेहरा बेचाराम मन्ना को दी गई है। तृणमूल सूत्रों व जानकारों के अनुसार, ममता बनर्जी 28 जनवरी को प्रशासनिक बैठक के लिए सिंगूर का दौरा कर सकती हैं। मुख्यमंत्री अपनी यात्रा के दौरान राज्य सरकार की कई विकास परियोजनाओं की घोषणा कर सकती हैं। ऐसे में केंद्र-राज्य तनाव के बीच सिंगूर का चयन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषक सिंगूर के चयन को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं। उद्योग और कृषि भूमि को लेकर तीव्र आंदोलनों का केंद्र रहा सिंगूर आज भी पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रतीकात्मक महत्व रखता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक के तुरंत बाद मुख्यमंत्री की प्रस्तावित यात्रा और विकास संबंधी घोषणाओं का महत्व केंद्र और राज्य के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच और भी बढ़ दिया है।
जानकारी की माने तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सिंगूर में लाभार्थियों को अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के फायदे बताएंगी। नवान्न सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री बांग्लार बाड़ी प्रोजेक्ट के तहत 16 लाख और परिवारों को पक्के घर बनाने के लिए पैसे की पहली किस्त देंगी।
वहीं तृणमूल सूत्रों की गौर करे तो, मुख्यमंत्री 28 जनवरी को प्रशासनिक बैठक से राजनीतिक संदेश भी दे सकती हैं। इस दिन सीएम प्रधानमंत्री और भाजपा को उचित व कड़ा संदेश व जवाब भी देंगी।
यह पहले ही ऐलान हो चुका है कि ममता सरकार 16 लाख परिवारों को घर बनाने के लिए पैसे देगी। शहर या उपनगरों से इसका अंदाज़ा लगाना शायद मुमकिन न हो, लेकिन जिले के ग्रामीण गरीबों से उक्त ऐलान से बहुत उम्मीदें हैं। 16 लाख परिवारों, यानी लगभग 60 से 80 लाख लोगों को सिर पर छत मिलेगी। इसके लिए राज्य सरकार 19 हजार करोड़ से कुछ अधिक खर्च करेगी। 16 लाख परिवारों को घर बनाने के लिए सीधे उनके बैंक अकाउंट में 1 लाख 20 हजार रुपये मिलेंगे। यानी, इस पर 19 हज़ार 20 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके साथ ही, एडमिनिस्ट्रेटिव खर्च भी बहुत अधिक होंगे। बहरहाल देखा जाए तो सिंगूर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल को बंगाल की सत्ता सौंपने में अहम भूमिका में रहा। सिंगूर ने सीएम ममता बनर्जी के अग्निकन्या व लड़ाकू नेत्री के चेहरे के जमकर चमकाया। ऐसे में कभी वाममोर्चा के प्रभाव में रहा सिंगूर देखते ही देखते ममता बनर्जी का गढ़ बन गया। 2011 में बंगाल में हुए परिवर्तन के पीछे सिंगूर का जंगी व अभूतपूर्व हाथ था। इतना ही नहीं, ममता के आंदोलन ने इस देश में सौ साल पुराने जमीन कानून में बदलाव के लिए बैकग्राउंड तैयार किया। 2016 के चुनाव के बाद भी दीदी सिंगूर लौटीं और सरसों के बीज बोए। अब देखना है कि अब सिंगूर की जमीं से एकबार फिर किस तरह के क्रांति का जन्म होगा। यह तो विधानसभा परिणाम से पता चलेगा।
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