नईदिल्ली,22 जनवरी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया, जिसमें भारतीय क्रिकेट टीम का नाम बदलने की अपील की गई थी। याचिका में कहा गया था कि कोर्ट भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को भारत की आधिकारिक राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के प्रतिनिधि के तौर पर पेश करने से रोके। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिका को तुच्छ बताते हुए याचिकाकर्ता के आवेदन की आलोचना की।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि बीसीसीआई तमिलनाडु सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत एक सोसाइटी के तौर पर रजिस्टर्ड है और यह भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन भी नहीं है और न ही यह सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 2 के तहत एक पब्लिक अथॉरिटी है। ऐसे में बीसीसीआई टीम को भारतीय टीम या भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम कहना कथित तौर पर जनता को गुमराह करता है।
बार एंड बेंच के मुताबिक, सीजेआई ने सुनवाई के दौरान कहा, आप घर पर बैठकर याचिकाएं तैयार करना शुरू कर दीजिए। इसमें समस्या क्या है? राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण के लिए भी अधिसूचना जारी हो चुकी है, जिसमें कुछ प्रमुख सदस्य भी शामिल हैं। न्यायालय पर बोझ मत डालिए। उन्होंने पहले भी इस तरह की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने पर कहा, हाई कोर्ट का फैसला अनुचित था। क्या कोई दंडात्मक जुर्माना नहीं लगाया गया था?
कोर्ट ने कहा कि जुर्माना न लगाए जाने के तथ्य ने याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट में जाने के लिए प्रोत्साहित किया है। हाालांकि, पीठ याचिकाकर्ता पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाना चाहती थी, लेकिन वकीलों के जोरदार अनुरोधों के बाद उसने इसे माफ कर दिया। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की कि बीसीसीआई को अनुकरणीय समर्थन प्राप्त है।
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