न्यूयॉर्क ,27 जनवरी । अमेरिका इन दिनों भीषण ठंड, बर्फीले तूफानों और आइसक्वेक (हिम भूकंप) की चपेट में है। देश के पूर्वोत्तर हिस्सों में सोमवार को आए शक्तिशाली शीत तूफान ने भारी तबाही मचाई, जिसमें अब तक कम से कम 30 लोगों की जान जा चुकी है। तूफान के अंतिम चरण में तेज बर्फबारी और दक्षिणी राज्यों में जमा देने वाली बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए।
लाखों लोग अंधेरे और ठंड में रहने को मजबूर
तूफान के कारण अर्कांसस से न्यू इंग्लैंड तक करीब 2,100 किलोमीटर के इलाके में एक फुट से अधिक बर्फ जम गई। इसका सीधा असर सड़क यातायात, हवाई सेवाओं और जनजीवन पर पड़ा। कई राज्यों में सड़कें बंद कर दी गईं, स्कूलों में छुट्टियां घोषित करनी पड़ीं और उड़ानें रद्द कर दी गईं। पावरआउटेज डॉट कॉम के अनुसार, सोमवार दोपहर तक 7.5 लाख से ज्यादा घरों और प्रतिष्ठानों की बिजली गुल रही, जिससे लोग कड़ाके की ठंड में ठिठुरते रहे।
तापमान शून्य से 31 डिग्री नीचे
राष्ट्रीय मौसम सेवा के मुताबिक, पिट्सबर्ग के उत्तरी इलाकों में 20 इंच तक बर्फबारी दर्ज की गई, जबकि कई क्षेत्रों में तापमान शून्य से 31 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अब तक कम से कम 25 मौतें सीधे तौर पर तूफान से जुड़ी हैं।
मिसिसिपी में 30 साल का सबसे भीषण बर्फीला तूफान
मिसिसिपी के कुछ हिस्से 1994 के बाद के सबसे खतरनाक बर्फीले तूफान का सामना कर रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए मिसिसिपी विश्वविद्यालय ने अपने ऑक्सफोर्ड परिसर में पूरे सप्ताह के लिए कक्षाएं रद्द कर दी हैं।
उड़ान सेवाएं चरमराईं
हवाई यातायात पर भी तूफान का बड़ा असर पड़ा है। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटअवेयर डॉट कॉम के अनुसार, सोमवार को अमेरिका में 8,000 से अधिक उड़ानें या तो रद्द की गईं या देरी से संचालित हुईं। विमानन विश्लेषण कंपनी सिरीअम के मुताबिक, रविवार को देश की करीब 45 प्रतिशत उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द हुई हैं।
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