न्यूयॉर्क ,27 जनवरी । भारत और यूरोपियन यूनियन (श्व) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (स्नञ्ज्र) को लेकर अमेरिका की नाराजग़ी खुलकर सामने आ गई है। समझौते की औपचारिक घोषणा से पहले ही अमेरिका ने यूरोप को चेतावनी देते हुए आरोप लगाया है कि भारत के साथ स्नञ्ज्र पर आगे बढ़कर यूरोप अप्रत्यक्ष रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध को वित्तीय मदद पहुंचा रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव (वित्त मंत्री) स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भले ही यूरोपीय देशों ने रूस से सीधे कच्चे तेल की खरीद में कटौती की हो, लेकिन अब वे भारत में रिफाइन किए गए रूसी तेल उत्पादों को खरीदने की तैयारी में हैं। इससे रूस को आर्थिक लाभ मिल रहा है और युद्ध को परोक्ष रूप से समर्थन मिल रहा है।
बेसेंट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारत और यूरोपियन यूनियन ने लंबे समय से लंबित स्नञ्ज्र वार्ताओं को अंतिम रूप दे दिया है और इस समझौते की औपचारिक घोषणा मंगलवार को होने की संभावना है।
अमेरिका का आरोप: बलिदान में असंतुलन
अमेरिकी वित्त मंत्री ने इस पूरे मुद्दे को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच बलिदान के असंतुलन के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि एक ओर अमेरिका रूस के ऊर्जा कारोबार को कमजोर करने के लिए कड़े कदम उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर यूरोप वैश्विक तेल व्यापार की खामियों का लाभ उठा रहा है। गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जिसमें रूसी तेल की खरीद को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ भी शामिल है।
‘यूरोप अपने ही खिलाफ जंग को फंड कर रहाÓ
स्कॉट बेसेंट ने दावा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इस युद्ध के दौरान यूरोप की तुलना में कहीं अधिक आर्थिक और राजनीतिक बलिदान दिया है।
्रक्चष्ट न्यूज के संडे कार्यक्रम में बेसेंट ने कहा,
हमने भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया। और पिछले सप्ताह क्या हुआ? यूरोप ने भारत के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। रूसी तेल भारत जाता है, वहां रिफाइन होता है और फिर वही उत्पाद यूरोप खरीदा जाता है। इस तरह यूरोप अपने ही खिलाफ चल रही जंग को फंड कर रहा है।
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