रायपुर 27 jan, (rns) । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में महासमुंद फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए तलाक के मामले की पुनः सुनवाई का आदेश दिया है। यह मामला एक पति द्वारा अपनी पत्नी पर आरोप लगाने से जुड़ा है कि उसने अपने बॉयफ्रेंड से वीडियो कॉल के दौरान न्यूड होकर बात की। हाईकोर्ट ने पति द्वारा पेश किए गए CCTV फुटेज को साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने का भी आदेश दिया, जिससे फैमिली कोर्ट के निर्णय को चुनौती दी गई थी।
इस मामले में, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि फैमिली कोर्ट को विशेष अधिकार प्राप्त है कि वह किसी भी दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को स्वीकार कर सकता है, भले ही वह भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B के प्रमाणपत्र के बिना हो। इस आदेश को इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की स्वीकार्यता के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
मामला रायगढ़ जिले के तमनार थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां महिला ने आरोप लगाया कि शादी के बाद उसके पति ने उसके साथ उत्पीड़न किया और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बेडरूम में बिना बताए CCTV कैमरे लगाए। इसके विरोध करने पर पति ने उसे मारपीट कर घर से निकालने की धमकी दी। महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कराई और फैमिली कोर्ट में दांपत्य अधिकारों की बहाली की याचिका दायर की।
वहीं, पति ने पत्नी पर अन्य पुरुषों के साथ अश्लील चैटिंग और वीडियो कॉल करने का आरोप लगाते हुए तलाक की याचिका दायर की। इस याचिका के समर्थन में उसने बेडरूम के CCTV फुटेज को सीडी के रूप में पेश किया था, जिसे फैमिली कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B के प्रमाणपत्र के बिना खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के इस आदेश को निरस्त कर दोबारा सुनवाई का आदेश दिया और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को रिकॉर्ड पर लेने के निर्देश दिए। यह फैसला फैमिली कोर्ट के मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की स्वीकार्यता को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

