नई दिल्ली ,30 जनवरी (आरएनएस)। 23 वर्षीय कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की विवादास्पद मौत के बाद गुरुवार को उन्हें पैतृक गांव परेऊ में उनके आश्रम में समाधि दी गई। साध्वी को बुधवार को जोधपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन कुछ ही देर बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।
साध्वी के पिता ने उठाए सवाल
साध्वी के पिता वीरमनाथ ने दावा किया कि बेटी को केवल मामूली जुकाम था। उनके अनुसार, जोधपुर के आश्रम में साध्वी को एक इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। मौत के तुरंत बाद साध्वी का कथित सुसाइड नोट सामने आया, जिसमें उन्होंने अपने जीवन और पुराने विवादों का जिक्र किया।
सामाजिक और कानूनी विवाद फिर चर्चा में
साध्वी के निधन के बाद उनका पुराना ब्लैकमेलिंग मामला फिर चर्चा में आ गया है। जुलाई 2025 में सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे एक व्यक्ति से गले मिलती नजर आई थीं। इसे अश्लील प्रचारित किया गया। साध्वी ने 16 जुलाई को बोरानाडा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी और बताया था कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति उनके पिता हैं। वीडियो 2021 का था, जब साध्वी अवसाद में थीं और पिता ने उनका हौसला बढ़ाया था।
पुराने साथियों की गिरफ्तारी
इस मामले की जांच में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों में जोगेंद्र उर्फ जोगाराम (साउंड सिस्टम), पूर्व ड्राइवर रमेश, जोगेंद्र की पत्नी कृष्णा और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं। साध्वी ने आरोप लगाया था कि जोगेंद्र ने घर में लगे सीसीटीवी कैमरे से वीडियो निकाला और धमकी देकर 20 लाख रुपए की मांग की। जब साध्वी ने पैसे देने से इनकार किया, तो वीडियो को एडिट करके सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया गया।
साध्वी ने कहा था—’मैं अग्निपरीक्षा के लिए तैयारÓ
तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने बाप-बेटी के रिश्ते को गलत तरीके से पेश कर साध्वी की छवि को धूमिल किया। साध्वी ने उस समय कहा था, इन लोगों ने भगवे पर कलंक लगाया है। मैं अपनी सच्चाई साबित करने के लिए अग्निपरीक्षा देने को तैयार हूं।
मौत के बाद सुसाइड नोट में भी इशारा
साध्वी के कथित सुसाइड नोट में उन्होंने उसी घटना की ओर इशारा किया था। उन्होंने लिखा, मैंने आदि गुरु शंकराचार्य और देश के कई महान संतों को पत्र लिखा, अग्निपरीक्षा के लिए निवेदन किया, लेकिन प्रकृति को क्या मंजूर था।
समाधि पैतृक गांव में
साध्वी के निधन के बाद कई भक्तों ने उनके पिता वीरमनाथ पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उन्होंने पोस्टमॉर्टम कराने से बचने की कोशिश की। पुलिस की समझाइश के बाद परिवार ने मान लिया। गुरुवार को साध्वी की पार्थिव देह बालोतरा जिले के परेऊ गांव ले जाई गई और शुक्रवार दोपहर को संत परंपरा के अनुसार उनके आश्रम में समाधि दी गई।
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