नईदिल्ली,31 जनवरी। कीमती धातुओं के बाजार में शुक्रवार को जबरदस्त भूचाल देखने को मिला. रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद सोना और चांदी दोनों की कीमतों में एक ही दिन में भारी गिरावट दर्ज की गई. जहां चांदी की कीमत एक लाख रुपये प्रति किलो से ज्यादा टूट गई, वहीं सोना भी 10 ग्राम पर 33 हजार रुपये से अधिक सस्ता हो गया.
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर चांदी ने गुरुवार को तेज उछाल के साथ इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर पार किया था. गुरुवार को चांदी 4,20,048 रुपये प्रति किलो के उच्चतम स्तर तक पहुंची, लेकिन शुक्रवार को वायदा कारोबार में जोरदार गिरावट देखने को मिली.
5 मार्च एक्सपायरी वाली चांदी का भाव गिरकर 2,91,922 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ. इस तरह चांदी एक ही दिन में 1,07,971 रुपये प्रति किलो टूट गई.
अगर चांदी के उच्चतम स्तर की बात करें, तो अपने रिकॉर्ड हाई से यह महज एक दिन में 1,28,126 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई. तेज तेजी के बाद आई इस गिरावट ने निवेशकों को हैरान कर दिया.
चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई. एमसीएक्स पर 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला 24 कैरेट सोना गुरुवार को 1,83,962 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था. शुक्रवार को कारोबार खत्म होने तक यह गिरकर 1,50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया. यानी सोना एक ही दिन में 33,113 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया.
गुरुवार को ही सोने ने 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम का अपना ऑल टाइम हाई बनाया था. इसके बाद आई तेज गिरावट के चलते सोना अपने उच्चतम स्तर से 42,247 रुपये प्रति 10 ग्राम टूट गया.
अमेरिका में फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन के रूप में केविन वार्श के नामांकन के बाद सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीद बढ़ी. इससे डॉलर मजबूत हुआ और सोना-चांदी कमजोर पड़े. ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में केविन वॉर्श की तारीफ करते हुए उन्हें ग्रेट बताया और कहा कि वह निवेशकों को कभी निराश नहीं करेंगे. केविन वॉर्श पहले फेड रिजर्व के गवर्नर रह चुके हैं. उन्हें महंगाई के खिलाफ सख्त रुख अपनाने वाला माना जाता है.
केविन वॉर्श के फेड रिजर्व का अगला चीफ बनने की खबर आते ही डॉलर इंडेक्स मजबूत होने लगा. इसके बाद निवेशकों ने कीमती धातुओं से पैसा निकालकर शेयर बाजारों और डॉलर में लगाना शुरू कर दिया. बस बुलियन मार्केट के बुलबुले की हवा निकलनी शुरू हो गई.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस गिरावट के पीछे केवल ट्रंप का ऐलान ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली भी जिम्मेदार है. पिछले कई हफ्तों से सोना और चांदी लगातार नई ऊंचाइयां बना रहे थे. ऐसे में निवेशकों को प्रॉफिट बुक करने का सही मौका मिल गया. डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर सख्त संकेतों ने बुलियन की चमक को फीका कर दिया.
विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी में सोने की तुलना में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है. रिकॉर्ड तेजी के बाद चांदी में मुनाफावसूली भी ज्यादा देखने को मिली.
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