नई दिल्ली ,27 अपै्रल ,। भारतीय रेलवे से रोजाना करोड़ों लोग सफर करते हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर लोगों के लिए सबसे बड़ी टेंशन टिकट के कन्फर्म होने की रहती है। खासकर त्योहारों और छुट्टियों के सीजन में वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी हो जाती है कि यात्रियों को समझ नहीं आता कि उनका टिकट कन्फर्म होगा या नहीं। कई बार लोग आधी-अधूरी जानकारी के साथ टिकट बुक कर लेते हैं और आखिरी वक्त पर वेटिंग क्लीयर न होने पर उन्हें भारी निराशा हाथ लगती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रेलवे ने वेटिंग टिकट को अलग-अलग कैटेगरी (त्रहृङ्खरु, क्ररुङ्खरु, क्कक्तङ्खरु, क्र्रष्ट और ञ्जक्तङ्खरु) में बांटा हुआ है? अगर आपको इन कोड्स और इनकी प्राथमिकता की सही जानकारी हो, तो आप स्मार्ट तरीके से बुकिंग करके कन्फर्म सीट पाने की अपनी संभावना को कई गुना तक बढ़ा सकते हैं।
इन वेटिंग टिकट्स के कन्फर्म होने की होती है सबसे ज्यादा गारंटी
रेलवे की जनरल वेटिंग लिस्ट (त्रहृङ्खरु) को हमेशा सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है। यह वेटिंग टिकट उन यात्रियों को जारी किया जाता है जो ट्रेन के शुरुआती स्टेशन से लेकर अंतिम स्टेशन तक का सफर करते हैं। इस कैटेगरी के टिकट कन्फर्म होने की संभावना सबसे ज्यादा, यानी करीब 80 से 90 प्रतिशत तक मानी जाती है। इसके बाद रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट (क्ररुङ्खरु) का नंबर आता है। यह उन यात्रियों के लिए होती है जो ट्रेन के रूट के बीच के बड़े स्टेशनों से यात्रा शुरू करते हैं। हालांकि इसमें त्रहृङ्खरु के मुकाबले कन्फर्म होने के चांस थोड़े कम होते हैं, लेकिन फिर भी 40 से 60 प्रतिशत तक टिकट पक्का होने की उम्मीद बनी रहती है।
ये टिकट लिए तो हो सकती है परेशानी, कन्फर्म होने के चांस बेहद कम
अगर बुकिंग के दौरान आपको पूल कोटा वेटिंग लिस्ट (क्कक्तङ्खरु) का टिकट मिल रहा है, तो सतर्क हो जाएं। यह आमतौर पर छोटी दूरी के यात्रियों के लिए होता है और इसमें टिकट कन्फर्म होने की गुंजाइश महज 20 से 30 प्रतिशत ही रहती है। वहीं, रोड साइड वेटिंग लिस्ट (क्रस्ङ्खरु) उन स्टेशनों के लिए जारी होती है जो शुरुआती स्टेशन के करीब होते हैं। इसमें सीट पक्की होने की संभावना और भी कम होकर 10 से 20 प्रतिशत तक रह जाती है। अगर हम सबसे ज्यादा जोखिम की बात करें, तो वह तत्काल वेटिंग लिस्ट (ञ्जक्तङ्खरु) में होता है। इसमें टिकट कन्फर्म होना लगभग नामुमकिन माना जाता है, क्योंकि आखिरी समय की बुकिंग होने के कारण इसकी संभावना शून्य से 10 प्रतिशत के बीच ही होती है।
क्र्रष्ट और सही प्लानिंग से अपनी यात्रा को बनाएं आसान
वेटिंग टिकट की अनिश्चितता से बचने के लिए रेलवे में एक और महत्वपूर्ण कैटेगरी आरएसी (क्र्रष्ट) की होती है। इस टिकट में भले ही आपको शुरुआत में पूरी बर्थ न मिले, लेकिन ट्रेन में चढ़कर यात्रा करने का मौका पक्का मिल जाता है। इसमें साइड लोअर सीट को किसी अन्य यात्री के साथ शेयर करना पड़ता है, लेकिन सफर के दौरान किसी का कन्फर्म टिकट रद्द होने पर पूरी सीट मिलने की प्रबल संभावना भी रहती है। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपको बिना किसी परेशानी के सफर करने का मौका मिले, तो हमेशा कोशिश करें कि त्रहृङ्खरु कैटेगरी में टिकट बुक हो। इसके साथ ही ऐन मौके की भागदौड़ से बचने के लिए यात्रा की तारीख से काफी पहले टिकट बुक कर लेना ही सबसे समझदारी भरा विकल्प है।
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