गोमा 31 जनवरी । पूर्वी कांगो के उत्तरी किवू प्रांत में स्थित रुबाया कोल्टन (कोलंबाइट-टैंटलाइट) खनन क्षेत्र में हुए भीषण भूस्खलन ने सैकड़ों परिवारों को तबाह कर दिया। भारी बारिश के बाद कई अवैध और छोटे पैमाने की खदानें ढह गईं, जिससे कम से कम 200 लोगों की मौत हो गई। मलबे में अब भी कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
एम23 विद्रोही समूह द्वारा नियुक्त गवर्नर के प्रवक्ता लुमुम्बा कंबेरे मुयिसा ने बताया कि मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कई शव अब भी कीचड़ और मलबे में फंसे हुए हैं, जिन्हें बाहर निकालना संभव नहीं हो पाया है। मरने वालों में खनन मजदूरों के अलावा बच्चे और बाजार में काम करने वाली महिलाएं भी शामिल हैं।
दर्जनों घायल, हालत गंभीर
हादसे में घायल हुए लगभग 20 लोगों का इलाज स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में किया जा रहा है। गंभीर रूप से घायल लोगों को शनिवार को एंबुलेंस के जरिए नजदीकी शहर गोमा रेफर किया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मरने वालों की संख्या 227 तक पहुंच सकती है।
एम23 के कब्जे में हैं रुबाया खदानें
रुबाया की कोल्टन खदानें फिलहाल एम23 विद्रोही समूह के नियंत्रण में हैं, जिसने अप्रैल 2024 से इस क्षेत्र पर कब्जा जमा रखा है। यह इलाका वैश्विक स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से दुनिया के लगभग 15 प्रतिशत कोल्टन का उत्पादन होता है। कोल्टन से मिलने वाला टैंटलम स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और आधुनिक तकनीक के निर्माण में इस्तेमाल किया जाता है।
यहां खनन छोटे पैमाने पर होता है, जहां मजदूर हाथों से खुदाई करते हैं और दिनभर की मेहनत के बदले महज कुछ डॉलर ही कमा पाते हैं। सुरक्षा उपायों की भारी कमी के कारण ऐसे हादसे अक्सर जानलेवा साबित होते हैं।
खनन गतिविधियों पर अस्थायी रोक
हादसे के बाद एम23 द्वारा नियुक्त गवर्नर ने रुबाया क्षेत्र में छोटे पैमाने के खनन पर अस्थायी रोक लगाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही खदानों के आसपास झुग्गी-झोपडिय़ों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने का निर्देश भी दिया गया है।
गौरतलब है कि पूर्वी कांगो पिछले कई दशकों से हिंसा और अस्थिरता का सामना कर रहा है। सरकारी बलों, रवांडा समर्थित एम23 विद्रोहियों और अन्य सशस्त्र समूहों के बीच लगातार संघर्ष जारी है। खनिज-समृद्ध होने के बावजूद यह क्षेत्र गंभीर मानवीय संकट, असुरक्षा और प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहा है। यह हादसा एक बार फिर खनन मजदूरों की उपेक्षित सुरक्षा व्यवस्था को उजागर करता है।
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