जौनपुर,31 जनवरी (आरएनएस)। कहा जाता है कि दो पहिया वाहनों पर चलने वाली दोनों सवारी हेलमेट लगाकर चलें तभी सफर सुरक्षित है लेकिन जनपद में यह फार्मूला जमीन पर रेयर ही दिखता है। पूरे जनवरी माह को राष्ट्रीय सडक सुरक्षा माह के रूप में मनाया गया लेकिन सडक चलते यदा कदा ही दिखाई दे कि बाइक पर सवार दोनों लोग हेलमेट लगाकर यात्रा कर रहे हों।पीछे बैठा व्यक्ति अगर पुरुष है तो गिनें चुने बाइक पर हेलमेट लगाये दिख जायें।अगर पीछे महिला बैठी है तो और मुश्किल है कि दोनों लोग हेलमेट लगाये दिखें और अगर पीछे बैठी सवारी बच्चा है तो शायद ही हेलमेट लगाये कभी आपको दिखा हो जबकि मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार चार वर्ष से अधिक आयु के बच्चे के लिए हेलमेट लगाना अनिवार्य है।यही जमीनी हकीकत है। जबकि जनपद देश के सडक दुघर्टना वाले टाप 100 जनपदों की सूची में शामिल है। जब बाइक पर दोनों सवार हेलमेट लगाकर चलते दिखते हैं तो उन्हें देखकर मन में यह खुशी होती है कि गुजरने वाले व्यक्ति केवल जुर्माने के डर से नहीं बल्कि जीवन के महत्व को समझते हैं इस कारण से दोनों सवारी हेलमेट लगाये हुये हैं। जनपद में दो सडकें अभी हाल में ही राष्ट्रीय राजमार्ग में तब्दील हुईं मछलीशहर-जंघई मार्ग और जौनपुर -रामपुर मार्ग इन सडकों किनारे बसे गांवों के लिए बेहद जरूरी था कि सडक यातायात जागरूकता कार्यक्रम विशेष रूप से चलाया जाता जिससे बिना हेलमेट के तेज रफ्तार से बाइक चलाने वाले युवाओं में इस बेहद गम्भीर मुद्दे के प्रति संवेदनशीलता पैदा होती क्योंकि ग्रामीण इलाकों में इस मामले में पुलिस शहर की तुलना में रोक- टोक कम करती है और सडक सुरक्षा को हल्के में लिया जाता है। ज्ञात हो कि स्टाकहोम घोषणा -2020 के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार 2030 तक सडक दुघर्टनाओं में होने वाली मृत्यु में 50 फीसदी कमी लाने के लिए प्रयास कर रही है लेकिन दुर्घटनाएं और उनसे होने वाली मौतें घटने के बजाय साल दर साल बढती ही जा रही हैं।
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