– एकमात्र बैंक पर बढ़ा दबाव, 20 गांवों के लोग परेशानय मजदूरों का भुगतान अटका, इलाज तक प्रभावित
सीतापुर 27 अप्रैल (आरएनएस)। कस्बा सकरन स्थित उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में पिछले दस दिनों से कैश न मिलने से ग्राहकों का गुस्सा फूट पड़ा है। शादी-विवाह के सहालग के बीच लोग अपने ही पैसे के लिए बैंक के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन सुबह से शाम तक इंतजार के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। ग्राहकों का आरोप है कि 18 अप्रैल से बैंक में नकदी का संकट बना हुआ है। कस्बे की इकलौती बैंक होने के कारण आसपास के 20 से अधिक गांवों के खाताधारक यहीं निर्भर हैं, जिससे भीड़ और परेशानी दोनों बढ़ गई हैं। हालात यह हैं कि लोग सुबह से लाइन में लग जाते हैं, लेकिन शाम तक कैश नहीं है कहकर वापस कर दिया जाता है। ग्राम पंचायत खजुरा के प्रधान रामू भार्गव ने बताया कि मनरेगा का पैसा मजदूरों के खातों में आ चुका है, लेकिन भुगतान न होने से मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वहीं चिल्लिहा के प्रधान प्रतिनिधि ब्रजकिशोर वर्मा ने कहा कि सहालग के समय भी बैंक की यह लापरवाही ग्रामीणों को भारी पड़ रही है। ताजपुर सलोली निवासी कमलेश यादव ने बताया कि उनके भाई का इलाज सीतापुर में चल रहा है, लेकिन दस दिन से पैसा न मिलने से उपचार तक प्रभावित हो रहा है। शाखा प्रबंधक ब्रजेश कुमार वर्मा का कहना है कि कैश के लिए डिमांड भेजी गई है। जरूरत पडऩे पर ग्राहकों का पैसा अन्य खातों में ट्रांसफर किया जा रहा है। हालांकि, ग्राहकों का सवाल हैकृजब अपना पैसा ही नहीं मिल रहा, तो बैंक किस काम का?
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