मॉस्को ,04 फरवरी । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद भारत-रूस संबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा तेज हो गई है। ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि भारत ने अमेरिका के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति दी है। हालांकि रूस ने इस दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि भारत की ओर से उन्हें ऐसा कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है।
ट्रंप का बड़ा दावा
ट्रंप ने बताया कि अमेरिका और भारत के बीच एक नया व्यापार समझौता हुआ है, जिसके तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर लगने वाला टैरिफ 50त्न से घटाकर 18त्न कर दिया गया है। इसके जवाब में ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा और अमेरिका से अधिक तेल खरीदेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत का रूस से तेल खरीदना यूक्रेन युद्ध में रूस को अप्रत्यक्ष मदद पहुंचा रहा है।
रूस की स्पष्ट प्रतिक्रिया
रूस के राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि मॉस्को भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी वाले रिश्तों को बेहद अहम मानता है और उन्हें और मजबूत करना चाहता है। पेसकोव ने कहा, अब तक हमें भारत की ओर से रूस से तेल खरीदने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला है।
उन्होंने आगे कहा, हम द्विपक्षीय अमेरिकी-भारतीय संबंधों का सम्मान करते हैं, लेकिन रूस-भारत रणनीतिक साझेदारी हमारे लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है। भारत के साथ हमारे संबंध अत्यंत मूल्यवान हैं और हम उन्हें आगे भी विकसित करना चाहते हैं।
तेल, कूटनीति और वैश्विक राजनीति
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से 2022 में भारत रियायती रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों ने इसे लेकर नाराजग़ी जताई और रूस की ऊर्जा आय को सीमित करने के लिए प्रतिबंध लगाए। भारत का रुख हमेशा यह रहा है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित प्राथमिकता में हैं।
हालांकि, ट्रंप के दावे और रूस के इनकार के बीच स्थिति अभी अस्पष्ट है। भारत की ओर से इस मसले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में तेल, व्यापार और कूटनीति का यह विवाद अभी जारी रहने की संभावना है।
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