सिरसा 4 फरवरी (आरएनएस)। भारतीय किसान यूनियन (हरियाणा) के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने अमेरिका के साथ किए जा रहे कथित कृषि उत्पाद समझौते को भारतीय किसानों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह डील देश के अन्नदाताओं को बर्बाद करने और खेती को कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने की साजिश है। रतन मान ने तीखा बयान देते हुए कहा कि सरकार विदेशी दबाव में आकर देश के किसानों की रोज़ी-रोटी बेचने पर तुली हुई है। अमेरिका जैसे देशों में किसानों को भारी सब्सिडी, आधुनिक मशीनें और बड़े पैमाने पर उत्पादन की सुविधा मिलती है। अगर ऐसे देशों के सस्ते कृषि उत्पाद भारत में खुलकर आने लगे, तो भारतीय किसान अपनी फसल का लागत मूल्य भी नहीं निकाल पाएंगे। उन्होंने कहा: यह समझौता नहीं, बल्कि भारतीय किसानों के खिलाफ आर्थिक हमला है। इससे मंडियां बर्बाद होंगी, एमएसपी व्यवस्था कमजोर होगी और खेती पूरी तरह निजी कंपनियों के कब्जे में चली जाएगी। रतन मान ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे पर न तो किसान संगठनों से बात की और न ही संसद में खुली चर्चा करवाई। उन्होंने कहा कि यह फैसला लोकतंत्र की भावना के खिलाफ और किसानों के साथ खुला धोखा है।
उन्होंने साफ चेतावनी दी: अगर सरकार ने यह किसान विरोधी समझौता तुरंत रद्द नहीं किया, तो भारतीय किसान यूनियन सड़कों से लेकर संसद तक बड़ा आंदोलन छेड़ेगी। देशभर के किसान ट्रैक्टरों के साथ सड़कों पर उतरेंगे और सरकार को यह फैसला वापस लेने पर मजबूर करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि यह केवल व्यापार का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों किसान परिवारों के अस्तित्व का सवाल है। विदेशी कंपनियों के फायदे के लिए देश के किसानों की कुर्बानी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।अंत में रतन मान ने कहा: देश का किसान जाग चुका है। अब दिल्ली की कुर्सियों पर बैठे लोग तय कर लें — वे विदेशी कंपनियों के साथ खड़े हैं या देश के अन्नदाताओं के साथ।
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