कोलकाता 4 फरवरी (आरएनएस)। बंगाल ममता सरकार व चुनाव आयोग में ठनी हुई है। जहां सीएम ममता आयोग पर हर रोज जुबानी हमले कर रही है। वहीं आयोग भी बंगाल में अपने अंदाज में काम कर रहा है। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया है जिसमें राज्य के 25 वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को अन्य राज्यों में चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में अनिवार्य प्रशिक्षण लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी। इस कदम को राज्य के शीर्ष स्तर के अधिकारियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय माना जा रहा है।
प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए निर्देशित अधिकारियों में राज्य गृह सचिव जगदीश मीना, आईपीएस अधिकारी प्रवीण त्रिपाठी और वरिष्ठ अधिकारी संजय बंसल शामिल हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि पर्यवेक्षक प्रशिक्षण प्रक्रिया के तहत इन अधिकारियों को पश्चिम बंगाल से बाहर चुनाव संबंधी कार्यों के लिए तैनात किया जाएगा। यह प्रशिक्षण विभिन्न राज्यों में चुनावों की निगरानी के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को तैयार करने हेतु चुनाव आयोग की मानक प्रक्रिया का हिस्सा है। चुनाव पर्यवेक्षक चुनावी प्रक्रियाओं की निगरानी और चुनावों के दौरान शिकायतों के निवारण द्वारा निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्य सरकार की याचिका खारिज होने पर कई प्रमुख प्रशासनिक हस्तियों की संलिप्तता के कारण ध्यान आकर्षित हुआ है। यह निर्देश राज्यों में चुनाव संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अधिकारियों की तैनाती पर चुनाव आयोग के अधिकार को रेखांकित करता है। बहरहाल असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में पश्चिम बंगाल के 25 वरिष्ठ अधिकारियों का चयन किया गया है।
राज्य सरकार का तर्क था कि चुनाव से पहले इन शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को बाहर भेजने से राज्य में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसी आधार पर राज्य की ओर से 25 में से 17 अधिकारियों को इस जिम्मेदारी से मुक्त करने की मांग की गई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने राज्य सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया और सभी नामित अधिकारियों को चुनावी प्रशिक्षण व केंद्रीय पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी निभाने के निर्देश जारी कर दिए। इस फैसले के बाद राज्य और आयोग के बीच चल रहा टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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