शिवरीनारायण 5 फरवरी 2026(आरएनएस) पौराणिक एवं धार्मिक महत्व से परिपूर्ण शिवरीनारायण स्थित कृष्ण वट (अक्षय वट) की महिमा अपार है। पं. हरीश तिवारी भोगहा ने बताया कि यह वट वृक्ष भगवान श्री रामचन्द्र जी एवं भगवान श्री कृष्ण जी की विशेष कृपा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि कृष्ण वट के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं पर प्रभु की कृपा और आशीर्वाद बना रहता है।
पं. तिवारी ने बताया कि श्रद्धालु यदि श्री राम एवं श्री कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं तो शिवरीनारायण स्थित कृष्ण वट अक्षय वट का दर्शन अवश्य करना चाहिए। माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कृष्ण वट के दर्शन-पूजन कर अपने जीवन को कृतार्थ किया।उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर यदि कृष्ण वट के पत्तों से बनी कटोरी में माखन-मिश्री का भोग लगाया जाए, तो भगवान श्री कृष्ण शीघ्र ही प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और जीवन की समस्याओं का निवारण करते हैं।पं. हरीश तिवारी ने बताया कि यह कृष्ण वट वृक्ष अत्यंत प्राचीन है, जिसे लगभग 5000 वर्ष पुराना माना जाता है। भारतवर्ष के गिने-चुने क्षेत्रों में ही यह दुर्लभ वट वृक्ष पाया जाता है। वर्तमान समय में अपनी जैविक बाधाओं और दुर्लभता के कारण यह वृक्ष लुप्तप्राय होने की कगार पर है, ऐसे में शिवरीनारायण स्थित कृष्ण वट के संरक्षण एवं सुरक्षा की अत्यंत आवश्यकता है।धार्मिक आस्था के अनुसार कृष्ण वट के प्रत्येक दोनेदार पत्ते पर शेषनाग का चित्र उभरता है। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण के बाल्यकाल में विषैले नागों से उनकी रक्षा के लिए शेषनाग ने अपने फणों से छाया कर उन्हें सुरक्षित रखा था। इसी घटना की स्मृति स्वरूप कृष्ण वट के पत्तों पर शेषनाग का चित्र बनता है, जो भगवान कृष्ण की दिव्य शक्ति और शेषनाग की भक्ति का प्रतीक है। एक अन्य मान्यता के अनुसार शेषनाग भगवान विष्णु की शेषशैय्या का अंश हैं और भगवान कृष्ण विष्णु के अवतार, इसलिए यह प्रतीकात्मक चिन्ह उनके अवतार भाव को दर्शाता है।पं. तिवारी ने यह भी बताया कि कृष्ण वट को बंशी वट वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है। श्रीधाम वृंदावन में भगवान श्री कृष्ण इसी वट वृक्ष के नीचे बैठकर बांसुरी बजाते थे और गोपियों के साथ महा रास लीला रचाते थे। वट वृक्ष के पत्तों को तोड़ने पर निकलने वाला सफेद तरल पदार्थ भगवान श्री कृष्ण के प्रिय भोग माखन का प्रतीक माना जाता है।कृष्ण वट न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह पर्यावरण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह वट वृक्ष वातावरण को शुद्ध करने और प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन प्रदान करने वाला माना जाता है। अक्षय वट कृष्ण वट भक्ति, पवित्रता और प्रकृति से जुड़ाव का जीवंत प्रतीक है।



















