इस्लामाबाद ,07 फरवरी । आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक शीर्ष कमांडर ने ऑपरेशन ‘सिंदूरÓ को लेकर सनसनीखेज दावा किया है। जैश के वरिष्ठ आतंकी इलियास कश्मीरी ने कथित तौर पर कहा है कि पाकिस्तानी सेना के शीर्ष नेतृत्व ने आतंकियों को इस संघर्ष को ‘गजवा-ए-हिंदÓ के रूप में प्रस्तुत किया था।
सूत्रों के मुताबिक, पांच फरवरी को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (क्कश्य) के रावलकोट में आयोजित एक गुप्त बैठक के दौरान इलियास कश्मीरी ने जैश के आतंकियों के सामने यह बयान दिया। इस बैठक का उद्देश्य संगठन में नए भर्ती किए गए आतंकियों को उकसाना और उन्हें हिंसक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना बताया जा रहा है।
युद्ध का धार्मिक रंग देने का आरोप
इलियास कश्मीरी ने अपने भाषण में दावा किया कि जैसे ही हालात सैन्य टकराव की ओर बढ़े और हथियारों की तैनाती हुई, उसी समय इसे धार्मिक युद्ध का रूप दे दिया गया। उसने कहा कि लड़ाकू विमान, टैंक और सैन्य संसाधनों की तैनाती के बीच इस अभियान को ‘गजवात-उल-हिंदÓ और ‘बुनयान-अल-मरसूसÓ जैसे शब्दों से जोड़ा गया।
आतंकियों को भड़काने की कोशिश
यह रैली जैश-ए-मोहम्मद में हाल ही में शामिल किए गए आतंकियों के लिए आयोजित की गई थी। भाषण के दौरान इलियास कश्मीरी ने खुले तौर पर आतंकवाद को संगठन की पहचान बताते हुए कहा कि हिंसा और जिहाद ही उनका उद्देश्य है। उसने दावा किया कि सरकार का समर्थन हो या न हो, उनका मकसद आतंक फैलाना ही रहेगा।
पहले भी कर चुका है खुलासे का दावा
इलियास कश्मीरी वही आतंकी है जिसने पहले यह दावा किया था कि सात मई को ऑपरेशन ‘सिंदूरÓ के दौरान बहावलपुर में हुए भारतीय हमले में जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर के परिवार के कई सदस्य मारे गए थे।
‘बुनयान-अल-मरसूसÓ नाम पर भी उठे सवाल
गौरतलब है कि ऑपरेशन ‘सिंदूरÓ के दौरान पाकिस्तान की ओर से अपने जवाबी अभियान को ‘बुनयान-अल-मरसूसÓ नाम दिया गया था, जिसका अर्थ एक बेहद मजबूत और अभेद्य दीवार बताया जाता है। इस नामकरण को पाकिस्तान की ओर से अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करने की कोशिश के तौर पर देखा गया था। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले को आतंकियों के मनोबल बढ़ाने और हिंसा को वैचारिक आधार देने की कोशिश के रूप में देख रही हैं।
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