रायपुर 7 फरवरी 2026(आरएनएस) राजधानी की सड़कों पर अब न पटाखों जैसी आवाज़ बर्दाश्त है, न नशे में रफ्तार का आतंक। पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होते ही रायपुर ट्रैफिक पुलिस ने नियम तोड़ने वालों के खिलाफ ऐसा सख्त मोर्चा खोला है कि शहर की सड़कों पर अनुशासन साफ नजर आने लगा है। मॉडीफाइड सायलेंसर लगाकर दहशत फैलाने वाले बुलेट सवार हों या नशे में वाहन दौड़ाने वाले चालक—हर किसी पर कानून का चाबुक चल रहा है।

पुलिस कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला के निर्देश पर शहर के प्रमुख मार्गों और चौक-चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की सख्त निगरानी जारी है। यातायात व्यवस्था में खलल डालने वालों और मोटरयान अधिनियम की अनदेखी करने वालों के खिलाफ बिना रियायत चालानी कार्रवाई की जा रही है।

इसी क्रम में मानक के विपरीत अवैध रूप से मॉडीफाइड सायलेंसर लगाकर बुलेट चलाने वालों पर विशेष अभियान चलाया गया। तेज आवाज और फटाखों जैसी गूंज से आम नागरिकों में डर और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा था। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस उपायुक्त श्री विकास कुमार के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त श्री विवेक शुक्ला एवं श्री दौलत राम पोर्ते के निर्देशन में 15 दिनों के भीतर 160 से अधिक बुलेट वाहनों को रोका गया और उनके मॉडीफाइड सायलेंसर जब्त किए गए। इतना ही नहीं, ऐसे सायलेंसर बेचने और लगाने वाले दुकानदारों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है।
दूसरी ओर, देर रात सड़कों को रेस ट्रैक समझने वाले नशेड़ी वाहन चालकों पर भी ट्रैफिक पुलिस की पैनी नजर है। नशे में धुत होकर वाहन चलाने वाले न सिर्फ अपनी जान, बल्कि दूसरों की जिंदगी से भी खिलवाड़ कर रहे थे। पिछले 15 दिनों में 90 से अधिक शराबी वाहन चालकों पर मोटरयान अधिनियम की धारा 185 के तहत कार्रवाई कर उन्हें सीधे अदालत भेजा गया, जहाँ माननीय न्यायालय ने प्रत्येक पर दस-दस हजार रुपये का भारी जुर्माना ठोका।

ट्रैफिक पुलिस का दो टूक संदेश है—शहर की यातायात व्यवस्था में सबसे बड़ी बाधा नशे में वाहन चलाने वाले चालक हैं, और ऐसे लोगों के लिए अब कोई नरमी नहीं होगी। रायपुर पुलिस लगातार अभियान चलाकर सड़कों को सुरक्षित बनाने में जुटी है।
अंत में पुलिस ने वाहन चालकों से साफ अपील की है कि नियमों का पालन करें और पुलिस का सहयोग करें। नाबालिगों को वाहन न सौंपें, दोपहिया पर हेलमेट और चारपहिया में सीट बेल्ट अनिवार्य रखें। वाहन चलाते समय मोबाइल से दूरी बनाएं और नशे की हालत में वाहन चलाने की भूल न करें। “सीमित गति—सुरक्षित जीवन” को मंत्र मानकर चलें, ताकि सड़कें शोर और हादसों से नहीं, अनुशासन से पहचानी जाएँ।

