मध्यप्रदेश 7 फरवरी 2026(आरएनएस) मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले मे मैगनिंज हो या सफेद सोना कहलाने वाली रेत या मुरुम मिट्टी जैसे गौड खनिज अवैध उतखन्न पुरे शबाब पर है. जिस पर नकेल कसने मे जिम्मेदारो के पशीने छुट रहे है आलम यह है कि खनन माफियाओ कि मनमानी से जिले का प्राकृतिक सौंदर्य भी तबाही कि कगार पर है.तो वही जिले मे दिन रात चल रहे अवैध खनन से स्थाई जल स्त्रोत नदी नालो का अस्तित्व खतरे मे है.हालाँकि उपसंचालक खनिज नुशरत जहां के नेतृत्व मे कर्मचारियों कि कमी से जूझ रहा खनिज विभाग अवैध उत्तखन्न रोकने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है.विगत 4 फरवरी को खनिज अमले ने वारासिवनी क्षेत्र अंतर्गत चंदन नदी से रेत का अवैध उतखन्न कर परिवहन कर रही 2 ट्रैक्टर ट्राली को जब्त किया है.इनमें पहला वाहन बिना नंबर का ट्रैक्टर (इंजन नंबर DB3009/SAE10147) तथा दूसरा वाहन क्रमांक CG-25-E-7715 शामिल है। दोनों वाहनों को तत्काल जप्त कर पुलिस थाना वारासिवनी की अभिरक्षा में रखा गया है।उप संचालक खनिज सुश्री फरहत जहां ने बताया कि ग्राम सरण्डी–खण्डवा के पास चंदन नदी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन की शिकायत मिलने पर खनिज अमले द्वारा मौके पर पहुंचकर जांच की गई। जांच के दौरान दो ट्रैक्टर-ट्राली खनिज रेत का अवैध रूप से उत्खनन एवं परिवहन करते पाए गए।
खनिज विभाग के अनुसार संबंधित वाहन चालकों एवं मालिकों द्वारा किया गया यह कृत्य मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भण्डारण का निवारण) नियम 2022 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन है। इस उल्लंघन के आधार पर प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया गया है तथा खनिज नियमों के अंतर्गत नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जा रही है. गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व भी वारासिवनी क्षेत्र से ही अवैध उतखन्न परिवहन मे लगी 3 और ट्रैक्टर ट्राली जप्त कि गई थी.

अवैध उतखन्न मे अव्वल हो रहा वारासिवनी क्षेत्र
पिछले कुछ माह से वारासिवनी क्षेत्र अवैध उतखन्न मे अव्वल हो रहा है.खेत से मुरुम मिट्टी हो या बिना रायल्टी के नदी नालो से रेत कि चोरी क्षेत्र मे अवैध उतखन्न चरम पर है.अवैध उतखन्न का यह खेल वनाँचल तक भी पहुँच चूका है. जिले के खनिज विभाग से अगर मुरुम मिट्टी के उतखन्न कि अनुमति कि जानकारी ली जाए तो शायद बड़ा खुलासा हो सकता है. जबकि क्षेत्र मे बिना अनुमति मुरुम मिट्टी का उतखन्न धड़ल्ले से जारी है. और स्थानीय जिम्मेदार शिकायत किए जाने पर खनिज अमले को सुचना देने कि बात कहकर अपने कर्तव्यों कि इति श्री कर लेते है यही वजह है कि खनन माफियाओ को क्षेत्र मे बढ़ावा मिल रहा है और वे दिलेरी से बिना किसी भय के अपने इस अवैध कारोबार को लगातार अंजाम दे रहे है. बड़ा सवाल यह है कि खनिज और गौड खनिजो के उतखन्न परिवहन मे उपयोग किए जाने वाले व्यवसायिक वाहन ट्रैक्टर जेसीबी पोकलैंड मे नंबर उनका पंजीयन, वाहनों के पीछे रिफलेक्टर होना बेहद जरुरी है. लेकिन क्षेत्र मे कृषि कार्य के नाम पर पंजीकृत वाहन भी इस कार्य मे बेरोकटोक उपयोग किए जा रहे है इनमे से अधिकतर वाहनो मे न तो नंबर लिखें होते न ही उनकी कोई पहचान होती है. दुर्घटना या हादसा होने के बाद ऐसे वाहनों कि पहचान करने मे पुलिस को भारी मशक्क्त करनी पडती है बावजूद इसके यह परिपाटी लंबे अरसे से यु ही चली आ रही है.ऐसे मे प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे यातायात जागरूकता जैसे अभियान महज छलावा साबित हो रहे है. प्रशासन को अभियान चलाकर ऐसे व्यवसायिक वाहनों कि जाँच करनी चाहिए ताकि व्यवस्था मे स्थाई सुधार हो सके. प्रभावी कार्यवाही के अभाव मे अवैध उतखन्न का यह बड़ा कारोबार दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है.

