ढाका ,08 फरवरी । बांग्लादेश के कद्दावर हिंदू नेताओं में शुमार और पूर्व मंत्री रमेश चंद्र सेन का शनिवार को पुलिस हिरासत में निधन हो गया। उनकी मौत के बाद एक बार फिर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार सवालों के घेरे में आ गई है। जहां प्रशासन इसे बीमारी से हुई मौत बता रहा है, वहीं सोशल मीडिया और दबी जुबान में लोग इसे ‘कस्टोडियल डेथÓ यानी हिरासत में हुई हत्या करार दे रहे हैं। 85 वर्षीय सेन अपनी बेदाग छवि और मददगार स्वभाव के लिए जाने जाते थे। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद जब बड़े-बड़े नेता देश छोड़कर भाग रहे थे, तब भी सेन ने अपने देश में ही रहने का फैसला किया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
अस्पताल पहुंचने के 20 मिनट के भीतर तोड़ा दम
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रमेश चंद्र सेन लंबे समय से कई बीमारियों से जूझ रहे थे। शनिवार सुबह दिनाजपुर जिला जेल में उनकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। जेल प्रशासन ने उन्हें सुबह करीब 9 बजकर 10 मिनट पर दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया। हालांकि, उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि इलाज शुरू होने के कुछ ही देर बाद, सुबह 9 बजकर 29 मिनट पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वह पांच बार सांसद रह चुके थे और पूर्व में जल संसाधन मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे। उन्होंने अपना आखिरी चुनाव 2024 में ही जीता था।
इलाज में लापरवाही और राजनीतिक बदले के आरोप
रमेश चंद्र सेन की मौत ने बांग्लादेश में जेलों की स्थिति और अवामी लीग के नेताओं के साथ हो रहे बर्ताव पर बहस छेड़ दी है। सूत्रों का कहना है कि मोहम्मद यूनुस की सरकार में एक पूर्व मंत्री होने के बावजूद सेन को जेल में वह मेडिकल देखभाल नहीं मिल रही थी, जिसके वे हकदार थे। उन पर हत्या समेत तीन मुकदमे दर्ज किए गए थे। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद से ही विपक्षी नेताओं के खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई के आरोप लग रहे हैं। हिरासत में बीमार पडऩे के बाद अब तक अवामी लीग के कम से कम पांच शीर्ष नेताओं की मौत हो चुकी है, जो प्रशासन की भूमिका पर सवालिया निशान लगाता है।
रस्सियों से बांधकर ले गई थी पुलिस
अगस्त 2024 में जब रमेश चंद्र सेन को गिरफ्तार किया गया था, तब उनकी कुछ विचलित करने वाली तस्वीरें सामने आई थीं। एक बुजुर्ग और प्रतिष्ठित राजनेता को पुलिस मवेशियों को बांधने वाली रस्सियों से बांधकर ले जा रही थी। उन तस्वीरों ने उस वक्त भी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को झकझोर दिया था। अब उनकी मौत के बाद बांग्लादेशी सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर है। ढाका के कंटेंट क्रिएटर प्रदीप कुमार चौधरी ने फेसबुक पर लिखा कि यह कोई सामान्य मौत नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन भले ही इसे बीमारी का नाम दे, लेकिन यह उस नरसंहार का हिस्सा है जो 5 अगस्त 2024 से चल रहा है। उन सैकड़ों हत्याओं की लिस्ट में अब रमेश चंद्र सेन का नाम भी जुड़ गया है।
चुनाव से पहले बढ़ा तनाव
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश में 12 फरवरी को राष्ट्रीय चुनाव होने वाले हैं। अवामी लीग को पहले ही इन चुनावों से बाहर रखा गया है और उसकी राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। ऐसे माहौल में एक बड़े हिंदू नेता और पूर्व मंत्री की जेल में मौत से तनाव और बढऩे की आशंका जताई जा रही है।
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