वॉशिंगटन ,08 फरवरी । भारत और अमेरिका के रिश्तों में 7 फरवरी 2026 का दिन एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया। दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा तैयार होने के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के खिलाफ अपना वह कड़ा कार्यकारी आदेश वापस ले लिया है, जिसके तहत रूसी तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था। हालांकि, टैरिफ हटने के बाद भी रूसी तेल की खरीद को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं है और यह मामला कूटनीतिक रहस्यों में लिपटा हुआ है।
ट्रंप का दावा और समझौते की शर्तें
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षर किए गए नए कार्यकारी आदेश में एक बड़ा दावा किया गया है। इसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि भारत ने रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके बदले में भारत ने अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदने और अगले 10 वर्षों के लिए रक्षा सहयोग बढ़ाने का आश्वासन दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने अपने आदेश में चेतावनी भी शामिल की है कि यदि भविष्य में अमेरिकी वाणिज्य सचिव को यह पता चलता है कि भारत ने दोबारा रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया है, तो 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क फिर से लागू कर दिया जाएगा।
भारत का रुख: इनकार नहीं, पर स्वीकार भी नहीं
ट्रंप के इस बड़े दावे पर भारत सरकार की ओर से शनिवार को कोई सीधा खंडन या पुष्टि नहीं की गई। जब अधिकारियों से इस पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने विदेश मंत्रालय (रूश्व्र) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के गुरुवार को दिए गए बयान का हवाला दिया। भारत ने अपने आधिकारिक पक्ष में कहा है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और बदलते बाजार को देखते हुए अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना ही भारत की रणनीति का मूल आधार है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए सार्वजनिक रूप से किसी दबाव में झुकने की बात स्वीकार नहीं करना चाहता, भले ही हाल के हफ्तों में रूसी तेल के आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई हो।
निर्यातकों को मिली संजीवनी, कम हुआ टैक्स
तेल को लेकर बने सस्पेंस के बीच यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। इस डील के बाद भारतीय सामानों पर प्रभावी शुल्क 50 प्रतिशत से घटकर सीधे 18 प्रतिशत पर आ जाएगा। इसका सीधा फायदा कपड़ा उद्योग, रत्न-आभूषण, फार्मा और विमानन पुर्जों के निर्यातकों को मिलेगा, जिन पर से अतिरिक्त शुल्क हटा लिए गए हैं। इस राहत के बदले में भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों जैसे बादाम, अखरोट और सोयाबीन तेल के साथ-साथ औद्योगिक सामानों पर टैरिफ कम करने की सहमति दी है। साथ ही भारत अगले 5 वर्षों में 500 अरब डॉलर की अमेरिकी खरीदारी करने के लिए भी तैयार हो गया है।
रूस और तेल के आंकड़ों की हकीकत
आंकड़ों पर गौर करें तो दिसंबर 2025 में भारत का रूसी तेल आयात 38 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया था, जो अमेरिकी शर्तों की ओर झुकाव का संकेत देता है। भारत ने वेनेजुएला से तेल खरीद और अमेरिका से एलएनजी (रुहृत्र) आयात बढ़ाने के विकल्प भी खुले रखे हैं। दूसरी ओर, रूस ने इस घटनाक्रम पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा है कि उन्हें भारत की ओर से तेल खरीद बंद करने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है और वे भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को महत्व देते हैं।
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