नई दिल्ली 11 Feb, (Rns)- भारत सरकार ने डीपफेक सहित एआई (AI) से तैयार की गई सामग्री को लेकर नियमों को और सख्त कर दिया है। नए संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 (Information Technology Rules, 2021) के अनुसार अब बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को अदालत या सरकारी निर्देश पर AI/Deepfake सामग्री को 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। यह नियम 20 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे।
सरकार का उद्देश्य सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलने वाली गलत, भ्रामक और हानिकारक सामग्री विशेषकर जो AI तकनीक से तैयार की जा रही है उस पर तेजी से नियंत्रण रखना है।
बदल गए समयसीमा के नियम
पहले प्लेटफॉर्म्स को सरकारी या न्यायालय के आदेश पर कंटेंट हटाने के लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था। अब इस समयसीमा को केवल 3 घंटे तक घटा दिया गया है, ताकि गलत जानकारी और भ्रामक AI सामग्री से होने वाले खतरों को जल्दी से रोका जा सके। साथ ही, उपभोक्ता शिकायतों के निवारण के लिए निर्धारित समयसीमा को भी कम कर दिया गया है, ताकि यूजर द्वारा रिपोर्ट की गई समस्याओं का निपटारा तेज़ी से हो सके।
नियमों के बाहर ये चीजें
इन नए नियमों से कुछ चीजों को बाहर रखा गया है जैसे कि सामान्य संपादन, किसी सामग्री को बेहतर बनाने और नेक नीयत से किए गए शैक्षिक या डिजाइन कार्यों को फिलहाल बाहर रखा गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अधिसूचना में इस बात की जानकारी दी है कि प्रमुख परिवर्तनों में बनावटी सामग्री को सूचना के रूप में मानना शामिल है। आईटी नियमों के तहत गैरकानूनी कार्यों के निर्धारण के लिए एआई कंटेंट को अन्य सूचनाओं के समान माना जाएगा।
नियमों के तहत एआई कंटेंट की अनिवार्य रूप से लेबलिंग जरूरी है। बनावटी कंटेंट बनाने या शेयर करने की सुविधा देने वाले प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी सामग्री पर स्पष्ट रूप से और प्रमुखता से लेबल लगाया जाए। जहां तकनीकी रूप से संभव हो, वहां इसे स्थायी मेटाडेटा या पहचानकर्ताओं के साथ जोड़ा जाना चाहिए। अधिसूचना में इस बात की भी जानकारी दी गई है कि इंटरमीडियरीज (प्लेटफॉर्म) एक बार एआई लेबल लगाए जाने के बाद उन्हें छिपाने या फिर हटाने की परमिशन नहीं दे सकते हैं।


















