0-पूंजीवाद-साम्यवाद के दौर में दीनदयाल ने दिया भारत का अपना मॉडल, एकात्म मानववाद आज नीतियों की आधारशिला: तरुण चुघ
नई दिल्ली, 11 फरवरी (आरएनएस)। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि के अवसर पर पं. मदन मोहन मालवीय स्मृति सदन, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, नई दिल्ली में युवा लेखक चन्दन कुमार की पुस्तक ‘समर्पणÓ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में वैचारिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक वरिष्ठ जन उपस्थित रहे। मंच पर एकात्म मानवदर्शन अनुसंधान एवं विकास संस्थान के अध्यक्ष डॉ. महेश चंद्र शर्मा, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री वी. सतीश, महाराष्ट्र राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) रविंद्र माधव साठे तथा राज्यसभा सांसद सी. सदानंद मास्टर (वीडियो संदेश के माध्यम से) उपस्थित रहे। डॉ. महेश चंद्र शर्मा, अध्यक्ष, एकात्म मानवदर्शन अनुसंधान एवं विकास संस्थान, ने कहा, दीनदयाल जी ने राजनीति को सत्ता नहीं, सेवा की साधना माना। ‘समर्पणÓ नई पीढ़ी को उनके सादगीपूर्ण और समर्पित जीवन से परिचित कराती है।तरुण चुघ, राष्ट्रीय महासचिव, भारतीय जनता पार्टी, ने कहा कि जब विश्व पूंजीवाद और साम्यवाद की विचारधाराओं के बीच खड़ा था, तब पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारत का अपना वैचारिक मॉडल प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एकात्म मानववाद केवल एक सैद्धांतिक दर्शन नहीं है, बल्कि उसे व्यवहार में उतारा गया है। ग्रामीण विकास, अंत्योदय, गरीब कल्याण, आवास, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़ी अनेक योजनाओं में उसी सोच की झलक दिखाई देती है। उन्होंने युवा लेखक के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस विषय पर और व्यापक अध्ययन की आवश्यकता है।रविंद्र माधव साठे, अध्यक्ष, महाराष्ट्र राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड (राज्यमंत्री दर्जा), ने कहा,
दीनदयाल जी का जीवन ‘स्वÓ से ‘समष्टिÓ की यात्रा है। यह पुस्तक युवाओं को सेवा और त्याग के मूल्यों से जोड़ेगी।सी. सदानंद मास्टर, सदस्य राज्यसभा, ने अपने वीडियो संदेश में कहा, देशहित में स्वयं को समाहित करना ही सच्चा समर्पण है। राष्ट्र सांस्कृतिक चेतना से बनता है, केवल सीमाओं से नहीं।रामाकांत पांडेय, साहित्य केंद्र प्रकाशन से जुड़े प्रकाशक, ने बताया, लोकार्पण से पहले ही 500 से अधिक प्रतियां वितरित हो चुकी हैं। यह किसी युवा लेखक के लिए बड़ी उपलब्धि है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के योगदान का भी स्मरण किया और कहा कि शिक्षा और संस्कार का समन्वय ही राष्ट्र निर्माण का आधार है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारतीय चिंतन परंपरा आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम है। समारोह के अंत में आयोजकों ने कहा कि ‘समर्पणÓ पुस्तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और एकात्म मानववाद को सरल भाषा में प्रस्तुत कर नई पीढ़ी को वैचारिक रूप से जोडऩे का माध्यम बनेगी। उपस्थित अतिथियों ने लेखक चन्दन कुमार को शुभकामनाएं दीं और इस वैचारिक पहल को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने की अपील की।
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