जयपुर ,12 फरवरी (आरएनएस)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधानसभा में चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर द्वारा राइट टू हेल्थ (क्रञ्ज॥) को लेकर दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ङ्ग पर सरकार को घेरते हुए कहा कि चिकित्सा मंत्री का यह कहना कि राइट टू हेल्थ की जरूरत ही नहीं है, न केवल निंदनीय है बल्कि प्रदेश के उस गरीब और मध्यम वर्ग के साथ भद्दा मजाक है जो इलाज के भारी-भरकम खर्च से जूझ रहा है। भाजपा ने मेडिकल लॉबी के सामने किया सरेंडर अशोक गहलोत ने वर्तमान भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेशवासी स्पष्ट देख रहे हैं कि जहां कांग्रेस सरकार का इरादा जनता को महंगे इलाज से बचाने का था, वहीं भाजपा सरकार ने मेडिकल लॉबी के सामने पूरी तरह सरेंडर कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसी दबाव के चलते अब स्वास्थ्य के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण कानून को ही गलत ठहराया जा रहा है।
चिरंजीवी और क्रञ्ज॥ की प्रासंगिकता पर दिया जोर
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि हमने चिरंजीवी योजना और निरोगी राजस्थान जैसी यूनिवर्सल हेल्थकेयर योजनाएं लागू करने के बावजूद राइट टू हेल्थ की परिकल्पना की थी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में कोई भी मरीज केवल पैसों या तकनीकी कारणों से इलाज से वंचित न रहे।
विफलता छिपाने के लिए बहानेबाजी का आरोप
गहलोत ने कहा, भाजपा सरकार पिछले एक साल में राइट टू हेल्थ के नियम (क्रह्वद्यद्गह्य) बनाने में पूरी तरह विफल रही है। अब अपनी इस प्रशासनिक विफलता को छिपाने के लिए इस तरह की बहानेबाजी की जा रही है।
उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि जनहित के इतने संवेदनशील और जरूरी मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय सरकार को जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी देनी चाहिए।
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