नई दिल्ली,13 फरवरी। भारतीय यात्रियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की चाहत रखने वाले नागरिकों के लिए एक सुखद खबर सामने आई है. साल 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट ने अपनी रैंकिंग में बड़ी छलांग लगाई है. पिछले साल के मुकाबले 10 पायदानों का सुधार करते हुए भारत अब 75वें स्थान पर पहुंच गया है. साल 2025 में भारत 85वें स्थान पर था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय पासपोर्ट की स्वीकार्यता बढ़ी है.
इस रैंकिंग में सुधार का सीधा फायदा आम भारतीय यात्रियों को मिलने वाला है. अब भारतीय पासपोर्ट धारक दुनिया के 56 देशों में बिना किसी पूर्व वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं. यह सुधार न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि विदेशों के साथ भारत के मजबूत होते कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों का भी प्रमाण है.
हालांकि 75वीं रैंक एक सकारात्मक कदम है, लेकिन भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साल 2006 में था, जब वह 71वें स्थान पर था. पिछले कुछ सालों में भारत की रैंकिंग में गिरावट देखी गई थी—साल 2024 में भारत 80वें और 2025 में 85वें पायदान पर खिसक गया था. मौजूदा उछाल ने इस गिरावट को रोकते हुए भारतीय पासपोर्ट को फिर से मजबूती की ओर धकेल दिया है.
वैश्विक स्तर पर सिंगापुर ने अपनी बादशाहत बरकरार रखी है. सिंगापुर का पासपोर्ट दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट बना हुआ है, जिसके नागरिक 192 देशों में बिना वीजा के प्रवेश कर सकते हैं. इसके बाद दूसरे स्थान पर जापान और दक्षिण कोरिया (187 देश) हैं, जबकि तीसरे स्थान पर स्वीडन और यूएई (186 देश) का कब्जा है. अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश भी टॉप 10 में बने हुए हैं.
बता दें कि, पासपोर्ट की शक्ति किसी देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और उसकी सॉफ्ट पावर का प्रतीक होती है. भारत का 75वें स्थान पर आना यह दर्शाता है कि दुनिया अब भारतीयों के लिए अपने दरवाजे और अधिक आसानी से खोल रही है.
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