चंडीगढ़ ,13 फरवरी (आरएनएस)। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जालंधर में प्रवर्तन निदेशालय (श्वष्ठ) के जॉइंट डायरेक्टर रवि तिवारी का तबादला चर्चा का विषय बना हुआ है। तिवारी वही आईआरएस (ढ्ढक्रस्) अधिकारी हैं, जिन्होंने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (स्नश्वरू्र) के तहत पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणइंदर सिंह को समन जारी किए थे। विभाग ने अब उन्हें तत्काल प्रभाव से जालंधर से हटाकर चेन्नई भेज दिया है।
बघेल के बयान से कांग्रेस में हड़कंप, सीएम पद के दावेदार परेशान
इस प्रशासनिक फेरबदल के बीच सियासी गलियारों में एक और बड़ी खबर ने तूफान खड़ा कर दिया है। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने गुरुवार को एक ऐसा बयान दिया, जिसने पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। बघेल ने संकेत दिए हैं कि अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस में वापसी करना चाहें, तो हाईकमान इस पर विचार कर सकता है। इस बयान ने पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नजर गड़ाए बैठे कई वरिष्ठ नेताओं की नींद उड़ा दी है। नेतृत्व की कतार में खड़े नेताओं को डर है कि कैप्टन की वापसी से उनका पत्ता कट सकता है।
गुटबाजी से तंग कांग्रेस को याद आए पुराने ‘कैप्टनÓ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का कैप्टन की ओर फिर से देखना पार्टी की मजबूरी और रणनीति दोनों है। दरअसल, पंजाब कांग्रेस इस वक्त गंभीर गुटबाजी के दौर से गुजर रही है। राहुल गांधी की तमाम चेतावनियों के बावजूद प्रदेश के बड़े नेता एक-दूसरे के अधीन काम करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में हाईकमान को लगता है कि कैप्टन ही वह चेहरा हैं, जो पहले भी पार्टी को एकजुट रख पाए थे। कांग्रेस को याद है कि जब पंजाब में बादल परिवार (अकाली दल) का एकछत्र राज था, तब कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ही उनका तिलिस्म तोड़ा था और दो बार कांग्रेस की सरकार बनवाई थी।
बेटी ने खारिज की अटकलें, कहा- भाजपा में ही रहेंगे
उधर, कांग्रेस की तरफ से डोरे डालने की कोशिशों के बीच कैप्टन परिवार ने फिलहाल ऐसी किसी भी संभावना से इनकार किया है। कैप्टन अमरिंदर सिंह की बेटी और पंजाब भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष जय इंदर कौर ने लुधियाना में स्पष्ट किया कि उनके पिता कहीं नहीं जा रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि कैप्टन भाजपा में हैं और भविष्य में भी भाजपा में ही रहेंगे। हालांकि, चुनाव से ठीक एक साल पहले उठी इस चिंगारी ने पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा छेड़ दी है।
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