नई दिल्ली ,13 फरवरी (आरएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (क्रक्चढ्ढ) ने कर्ज वसूली (रिकवरी) के तरीकों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय बैंक ने सभी वित्तीय संस्थानों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत अब रिकवरी एजेंट कर्ज चुकाने में असमर्थ या देरी करने वाले ग्राहकों के साथ किसी भी सूरत में बदतमीजी नहीं कर सकेंगे। यह नया आदेश सभी सरकारी और निजी बैंकों, ग्रामीण बैंकों, एनबीएफसी (हृक्चस्नष्ट), हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और सहकारी बैंकों पर समान रूप से लागू होगा। क्रक्चढ्ढ का मकसद उन ग्राहकों को मानसिक प्रताडऩा और गैर-जरूरी दबाव से बचाना है, जो किसी मजबूरी के चलते समय पर कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं।
रिकवरी एजेंट्स के लिए पुलिस वेरिफिकेशन और ट्रेनिंग जरूरी
क्रक्चढ्ढ ने स्पष्ट कर दिया है कि रिकवरी की प्रक्रिया सिर्फ कानूनी ही नहीं, बल्कि मानवीय भी होनी चाहिए। अब बैंकों को एक स्पष्ट नीति बनानी होगी, जिसमें रिकवरी एजेंट्स की योग्यता और उनकी निगरानी के नियम तय होंगे। सबसे अहम बात यह है कि अब कोई भी व्यक्ति आसानी से रिकवरी एजेंट नहीं बन सकेगा। बैंकों को नियुक्ति से पहले उनका पुलिस वेरिफिकेशन और बैकग्राउंड चेक करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, एजेंट्स के पास ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंसÓ (ढ्ढढ्ढक्चस्न) या उससे जुड़े संस्थानों से रिकवरी का ट्रेनिंग सर्टिफिकेट होना जरूरी होगा। अगर कोई एजेंट नियमों को तोड़ता है, तो बैंक को उस पर कार्रवाई करनी होगी और उसे नौकरी से हटाना होगा।
सुबह 8 से शाम 7 बजे तक ही कर सकेंगे कॉल
आम लोगों को राहत देते हुए क्रक्चढ्ढ ने संपर्क करने के समय को भी निर्धारित कर दिया है। नए नियमों के मुताबिक, बैंक कर्मचारी या रिकवरी एजेंट ग्राहकों को सिर्फ सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही कॉल कर सकते हैं। अगर ग्राहक किसी विशेष समय पर कॉल न करने की विनती करता है, तो उसका सम्मान करना होगा। इसके अलावा, मानवीय आधार पर यह भी कहा गया है कि परिवार में किसी की मृत्यु, शादी-विवाह या त्योहारों जैसे मौकों पर वसूली के लिए कॉल या घर जाने से बचना होगा। साथ ही, इंटरनेट मीडिया पर मैसेज भेजकर या दोस्तों-रिश्तेदारों को फोन करके परेशान करने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
कॉल रिकॉर्डिंग होगी अनिवार्य, वेबसाइट पर देनी होगी जानकारी
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बैंकों को अब अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर रिकवरी एजेंट्स की अपडेटेड लिस्ट (नाम और नंबर के साथ) सार्वजनिक करनी होगी। केस रिकवरी एजेंट को सौंपने से पहले बैंक को ग्राहक को एसएमएस या ईमेल के जरिए सूचित करना होगा। वसूली के दौरान की गई सभी कॉल रिकॉर्ड की जाएंगी और ग्राहक को यह बताना अनिवार्य होगा कि कॉल रिकॉर्ड हो रही है। एजेंट न तो गाली-गलौज कर सकते हैं, न ही शारीरिक हिंसा की धमकी दे सकते हैं। अगर ग्राहक कोई शिकायत दर्ज करवाता है, तो जब तक उसका निपटारा नहीं हो जाता, तब तक रिकवरी प्रक्रिया रोकनी होगी।
बढ़ती शिकायतों और आत्महत्याओं के बाद लिया गया फैसला
क्रक्चढ्ढ को यह कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि पिछले कुछ सालों में रिकवरी एजेंट्स की मनमानी और अमानवीय व्यवहार की शिकायतें तेजी से बढ़ी थीं। कई मामलों में देखा गया कि एजेंट्स ने कर्जदारों को इतना प्रताडि़त किया, गालियां दीं और धमकाया कि मजबूर होकर कुछ लोगों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया। विशेषकर माइक्रोफाइनेंस और छोटे कर्ज के मामलों में 2023-24 के दौरान कई राज्यों से ऐसी दर्दनाक खबरें सामने आई थीं, जिसके बाद केंद्रीय बैंक ने अब नकेल कस दी है।
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