देहरादून,14 फरवरी (आरएनएस)। दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग ने टीबी उन्मूलन में बड़ी सफलता हासिल की है। अस्पताल ने एक साल के भीतर दवा-प्रतिरोधी यानि एमडीआर टीबी के गंभीर मामलों में भी मरीजों को नया जीवन दिया है। शनिवार को प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने बताया कि एक साल के भीतर 1441 टीबी मरीजों का उपचार किया गया। इसमें 872 पल्मोनरी (फेफड़ों की टीबी), 449 एक्स्ट्रा-पल्मोनरी और 120 बच्चे शामिल हैं। सबसे बड़ी चुनौती माने जाने वाले 57 एमडीआर-टीबी मरीजों का भी सफल इलाज किया। इसमें से 24 मरीजों को कम समय वाली शॉर्टर बीपालएम रेजीमेन पर रखा गया है। प्रिवेंटिव थैरेपी पर जोर एचओडी डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि इलाज के साथ-साथ संक्रमण की चेन तोडऩे के लिए टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी पर विशेष फोकस है। इसमें मरीजों के संपर्क में आए बच्चों और परिजनों को सुरक्षित रखने की रणनीति अपनाई गई है। अक्षय मित्र पहल के जरिए सामाजिक सहयोग से मरीजों को पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उनकी रिकवरी तेज हो रही है। ये है एमडीआर टीबी? डॉ. अग्रवाल के मुताबिक टीबी की दवा बीच में छोडऩा, अनियमित सेवन या गलत दवा संयोजन से एमडीआर-टीबी का खतरा पैदा होता है। यह सामान्य टीबी से अधिक घातक है और इसके इलाज की प्रक्रिया भी लंबी और जटिल होती है।
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