लखनऊ ,14 फरवरी (आरएनएस)। लोक निर्माण विभाग, उत्तर प्रदेश ने विभागीय निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अत्यधिक कम दरों पर प्राप्त होने वाली निविदाओं के निस्तारण के लिए एक विस्तृत कॉन्सेप्ट नोट तैयार किया है। विभाग का मानना है कि असामान्य रूप से कम दरों पर प्राप्त निविदाएं कई बार कार्य की गुणवत्ता, अनुबंधीय दायित्वों के निर्वहन और परियोजनाओं की समयसीमा को प्रभावित करती हैं, जिससे विवाद और कानूनी जटिलताएं उत्पन्न होती हैं।प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष अशोक कुमार द्विवेदी द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि इस संबंध में तकनीकी विशेषज्ञों, ठेकेदारों, संस्थानों और अन्य हितधारकों से 28 फरवरी 2026 तक ई-मेल के माध्यम से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। विभाग को आशा है कि प्राप्त सुझावों के आधार पर एक पारदर्शी, व्यावहारिक और उत्तरदायी प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी।कॉन्सेप्ट नोट के अनुसार 5 करोड़ रुपये से कम लागत वाले कार्यों में यदि निविदा दर अनुमानित लागत से 10 प्रतिशत से अधिक कम होती है तो अतिरिक्त परफारमेंस सिक्योरिटी जमा करानी होगी। 15 प्रतिशत से कम दरों के मामलों में निर्माणाधीन कार्यों की गुणवत्ता की विशेष जांच कराई जाएगी और खराब गुणवत्ता पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार को दो वर्ष के लिए डिबार किया जा सकेगा।इसी प्रकार 5 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले कार्यों में भी 10 प्रतिशत से अधिक कम दरों पर अतिरिक्त परफारमेंस सिक्योरिटी अनिवार्य होगी तथा 15 प्रतिशत से अधिक कम दरों के मामलों में मुख्य अभियंता स्तर से गुणवत्ता जांच कराई जाएगी। अन्य विभागों में चल रहे 5 करोड़ रुपये से अधिक लागत के कार्यों की जानकारी निविदा के समय अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी। कार्य छिपाने या गलत सूचना देने की स्थिति में ठेकेदार को डिबार करने और अनुबंध निरस्त करने का प्रावधान रखा गया है।विभाग का कहना है कि इस नई प्रक्रिया से अव्यवहारिक रूप से कम दरों पर रोक लगेगी, ठेकेदारों की जवाबदेही तय होगी और निर्माण कार्य समयबद्ध, टिकाऊ तथा मानक अनुरूप पूरे किए जा सकेंगे।
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