नई दिल्ली ,14 फरवरी (आरएनएस)। भारतीय रेलवे ने अपने करोड़ों आम यात्रियों को एक बड़ी और ऐतिहासिक राहत देने का ऐलान किया है। अक्सर यह शिकायत रहती थी कि फर्स्ट क्लास और एसी कोच तो चमचमाते रहते हैं, लेकिन जनरल डिब्बों में सफर करने वाले यात्रियों को गंदगी और बदबू का सामना करना पड़ता है। अब यह पुरानी तस्वीर पूरी तरह से बदलने जा रही है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट कर दिया है कि साफ-सफाई के मामले में अब किसी भी यात्री के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। रेलवे ने अपने महात्वाकांक्षी ‘रिफार्म प्लान 2026Ó के तहत कमर कस ली है, जिसका सीधा और सकारात्मक असर आम आदमी की रेल यात्रा पर पडऩे वाला है।
जनरल कोच की सफाई पर रहेगा विशेष फोकस
रेलवे ने एक बेहद व्यापक कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत अगले 52 हफ्तों में 52 बड़े और अहम बदलाव (रिफॉर्म) किए जाएंगे। इस बड़े अभियान की शुरुआत ‘साफ-सफाईÓ से ही हो रही है। रेल मंत्री के अनुसार, अब ट्रेन के हर कोच की सफाई यात्रा के दौरान ही सुनिश्चित की जाएगी और इसमें जनरल कोच को सबसे ऊपर रखा गया है। चूंकि जनरल कोच ट्रेन के बाकी हिस्सों से अंदर से जुड़े (1द्गह्यह्लद्बड्ढह्वद्यद्ग) नहीं होते हैं, इसलिए सफाई कर्मचारी चलती ट्रेन में वहां तक नहीं पहुंच पाते थे। अब इसका पक्का इंतजाम कर लिया गया है। स्टेशनों पर ट्रेन के रुकते ही सफाई स्टाफ नीचे उतरेगा और सीधे जनरल कोच में जाकर टॉयलेट, कचरे के डिब्बे और पूरे डिब्बे की सफाई करेगा। शुरुआत में हर जोन में 4-5 ट्रेनों को इसके लिए चुना गया है, जिसके बाद इसे 80-80 ट्रेनों के समूह में लागू किया जाएगा।
सफाई में कोताही पर एक्शन, ्रढ्ढ रखेगा पैनी नजर
रेलवे ने साफ कर दिया है कि अब सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस पूरी व्यवस्था को हाई-टेक और पारदर्शी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (्रढ्ढ) की मदद ली जा रही है। सफाई के तुरंत बाद कोच की तस्वीरें सीधे एक सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल रूम में भेजी जाएंगी, जहां ्रढ्ढ आधारित सिस्टम यह जांचेगा कि सफाई तय मानकों के अनुसार हुई है या नहीं। अगर कहीं भी गंदगी या कमी पाई गई, तो संबंधित वेंडर या ठेकेदार पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में सफाई के ठेके भी उन्हीं को मिलेंगे जिनका ट्रैक रिकॉर्ड बेहतरीन होगा। पीक ऑवर्स में भीड़ को देखते हुए रेलवे अतिरिक्त स्टाफ तैनात करेगा ताकि हर यात्री को एक साफ-सुथरा माहौल मिल सके।
कार्गो टर्मिनल्स से कमाई की नई और तेज रफ़्तार
यात्री सुविधाओं को सुधारने के साथ-साथ रेलवे ने अपनी कमाई और माल ढुलाई (कार्गो) को लेकर भी बड़े रणनीतिक फैसले लिए हैं। निवेशकों का भरोसा जीतने और लंबी स्थिरता बनाए रखने के लिए गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल्स के कॉन्ट्रैक्ट की समय सीमा को 35 साल से बढ़ाकर अब 50 साल कर दिया गया है। बीते तीन सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो देश भर में 124 कार्गो टर्मिनल तैयार हो चुके हैं, जिससे रेलवे के खजाने में 20,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम राजस्व आया है। अब सरकार का लक्ष्य अगले पांच सालों में 500 से ज्यादा ऐसे गतिशक्ति कार्गो टर्मिनल बनाने का है। इन नए रिफॉर्म्स से अनुमान है कि अगले तीन सालों में रेलवे को 30,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बंपर कमाई होगी, जो रेलवे की आर्थिक सेहत सुधारने के साथ लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी बड़ी क्रांति लाएगी।
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