कोलकाता 21 Feb, (Rns)- पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध साहित्यकार मणि शंकर मुखर्जी (शंकर) का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि बंगाल के प्रख्यात साहित्यकार मणि शंकर मुखर्जी (शंकर) के निधन से मैं अत्यंत दुखी हूं। उनके निधन से बंगाली साहित्य ने अपने एक प्रतिभाशाली सितारे को खो दिया है। उन्होंने कहा कि चौरंगी से लेकर काटो अजनारे तक, और सीमाबद्ध से लेकर जना आरण्य तक, उनकी कालजयी रचनाओं ने बंगाली पाठकों की कई पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया है। उनके लेखन के माध्यम से आम लोगों के संघर्षों की अनकही कहानियों को सशक्त अभिव्यक्ति मिली। स्वामी विवेकानंद पर उनका गहन शोध और कार्य, विशेष रूप से, हमारे लिए अमूल्य धरोहर हैं। उनका निधन हमारी सांस्कृतिक दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मैं उनके शोक संतप्त परिवार और असंख्य प्रशंसकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करती हूं।
बता दें कि उनका जन्म 7 दिसंबर 1933 को हुगली में हुआ था। उनका बचपन हावड़ा और बोंगाव में बीता। उनके पिता की कम उम्र में मौत हो गई थी, जिसके बाद उनका जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने अपने संघर्ष के दौरान कई तरह के काम भी किए। उनकी कई प्रसिद्ध रचनाएं हैं, जिनमें ‘चौरांगी’ एक है। यह स्वतंत्र कोलकाता के होटल जीवन और साहेबपाड़ा की मानवीय टकराहटों पर आधारित है। अंग्रेजी में इसका अनुवाद किया गया और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय रही। इसके अलावा ‘कटे अजनारे’ भी काफी लोकप्रिय रचना रही। मणिशंकर मुखर्जी बंगाल साहित्य के सबसे लोकप्रिय और वरिष्ठ लेखकों में से एक थे। उनको साहित्य अकादमी अवार्ड सहित कई सम्मान मिले। उन्होंने स्वामी विवेकानंद पर किताबें लिखीं, उपन्यास लिखे, निबंध और रिसर्च कार्य भी किए। उनके निधन से बंगाल साहित्य जगत में शोक की लहर है।

