जांजगीर-चांपा , 21 फरवरी (आरएनएस)। पुलिस ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से अनुसंधान कार्यों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम पहल की है। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय के निर्देशन में शनिवार को पुलिस लाइन जांजगीर स्थित प्रशिक्षण कक्ष में एक दिवसीय विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें ई-साक्ष्य, ई-समंस, ई-एफएसएल, ई-प्रॉसीक्यूशन (मॉड्यूल एपीआर) और रूद्गस्रद्य-ए-पीआर जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल मॉड्यूल्स पर अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के सभी थाना एवं चौकी प्रभारी, विवेचना अधिकारी और ष्टष्टञ्जहृस् ऑपरेटर आरक्षक शामिल हुए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार कश्यप ने प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग कर जांच प्रक्रिया को समयबद्ध, सटीक और गुणवत्तापूर्ण बनाना आवश्यक है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि थाना स्तर पर प्रकरणों की नियमित समीक्षा कर ऑनलाइन सिस्टम को प्रभावी रूप से लागू करें।
कार्यक्रम में ई-साक्ष्य मॉड्यूल के तहत डिजिटल साक्ष्यों जैसे फोटो, वीडियो और दस्तावेजों के सुरक्षित अपलोड और न्यायालय में उपयोग की प्रक्रिया समझाई गई। ई-समंस प्रणाली के जरिए न्यायालय से प्राप्त समंस और वारंट की ऑनलाइन प्राप्ति, तामिली और रिपोर्टिंग की जानकारी दी गई। वहीं ई-एफएसएल के माध्यम से फॉरेंसिक नमूनों की ऑनलाइन एंट्री, ट्रैकिंग और रिपोर्ट प्राप्ति की प्रक्रिया को विस्तार से बताया गया।

ई-प्रॉसीक्यूशन (एपीआर मॉड्यूल) के जरिए अभियोजन शाखा के साथ बेहतर समन्वय, केस डायरी और दस्तावेजों के डिजिटल आदान-प्रदान तथा लंबित प्रकरणों की मॉनिटरिंग के बारे में भी प्रशिक्षण दिया गया। रूद्गस्रद्य-ए-पीआर मॉड्यूल के तहत थानों से डॉक्टरों को ऑनलाइन एमएलसी और पोस्टमार्टम फॉर्म भेजने की प्रक्रिया का भी अभ्यास कराया गया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रोजेक्टर के माध्यम से लाइव डेमो प्रस्तुत किया गया और अधिकारियों को हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल भी कराया गया। साथ ही डेटा एंट्री में सावधानियां, सामान्य त्रुटियों से बचाव और साइबर सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी मार्गदर्शन दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया और भविष्य में भी इस तरह के तकनीकी प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित करने की बात कही गई, ताकि पुलिस कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़, आधुनिक और परिणामोन्मुखी बनाया जा सके।
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