नईदिल्ली,22 फरवरी। भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने टी-20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 चरण के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) द्वारा अपनाई गई पूर्व-सीडिंग प्रणाली का बचाव किया है। इस प्रारूप को लेकर सोशल मीडिया पर आईसीसी की व्यापक रूप से आलोचना की गई है, क्योंकि इसमें चारों ग्रुप की शीर्ष टीमों को ग्रुप-1 और दूसरे नंबर की टीमों को ग्रुप-2 में रखा गया है। इस व्यवस्था से ग्रुप ऑफ डेथ की स्थिति बन गई है।
गावस्कर ने आलोचना के समय पर सवाल उठाते हुए पूछा कि टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ऐसी चिंताएं क्यों नहीं उठाई गईं। उन्होंने कहा, इसे अब क्यों उठाया जा रहा है? टूर्नामेंट शुरू होने से पहले इस पर चर्चा क्यों नहीं हुई? पूर्व क्रिकेटर ने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा और सीमा शुल्क निकासी संबंधी समस्याओं के कारण आईसीसी द्वारा टीमों को पूर्व-क्रमबद्ध करने के निर्णय का एक कारण लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियां हो सकती हैं।
गावस्कर ने दो देशों में इस तरह के टूर्नामेंट के आयोजन में आने वाली रसद संबंधी जटिलताओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा, अंतरराष्ट्रीय यात्रा, आव्रजन और सीमा शुल्क, इन सभी चीजों का टूर्नामेंट के प्रारूप में पूरा ध्यान रखना पड़ता है। हर टीम में लोगों या सहायक कर्मचारियों की संख्या समान नहीं होती, जिससे होटल बुकिंग के साथ उनकी पसंद की रसद सामग्री समेत अन्य व्यवस्थाएं करना और भी जटिल हो जाता हैं।
आईसीसी ने अपने प्री-सीडिंग मॉडल का बचाव करते हुए इसे एक लॉजिस्टिकल आवश्यकता बताया है, जिससे प्रसारकों और आयोजकों को यात्रा व्यवस्था, आयोजन स्थलों और प्राइम-टाइम मैच शेड्यूल को महीनों पहले अंतिम रूप देने में मदद मिलती है। हालांकि, इस निर्णय से टूर्नामेंट में प्रतिस्पर्धात्मक असंतुलन पैदा हो रहा है। ग्रुप चरण की शीर्ष और दूसरे नंबर की टीमों के अलग-अलग ग्रुप होने से प्रमुख टीमों का सफर जल्द समाप्त होगा।
००

