0-401 चेहरों पर लौटी मुस्कान, कल तक जो लाचार थे आज वो आत्मनिर्भर हैं
सुकमा, 22 फरवरी (आरएनएस)। जब इरादे नेक हों और नेतृत्व संवेदनशील, तो सुदूर वनांचलों तक भी बदलाव की बयार पहुँचती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप सुकमा जिले के शबरी ऑडिटोरियम में आयोजित तीन दिवसीय शिविर महज एक आयोजन नहीं, बल्कि उन 401 दिव्यांगों के लिए एक नया जन्म था, जिन्होंने कभी अपनी शारीरिक बाधाओं को नियति मान लिया था।
उम्मीदों का ‘जयपुर फुटÓ और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के समन्वय से आयोजित इस शिविर में भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर के विशेषज्ञों ने अपनी जादुई तकनीक से दिव्यांगजनों के जीवन में रंग भर दिए। शिविर का माहौल तब भावुक हो गया जब वर्षों से बैसाखियों के सहारे चल रहे बुजुर्गों और युवाओं को आधुनिक ‘जयपुर फुटÓ और कृत्रिम हाथ मिले।
जिला प्रशासन की संवेदनशीलता
धरातल पर उतरी सरकारी योजना
कलेक्टर अमित कुमार ने स्वयं शिविर का सूक्ष्म निरीक्षण किया। उन्होंने न केवल डॉक्टरों की टीम से तकनीकी चर्चा की, बल्कि हितग्राहियों के पास बैठकर उनका हाल-चाल जाना। जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिले का एक भी पात्र दिव्यांग इस लाभ से वंचित न रहे।
शिविर की बड़ी उपलब्धियाँ: एक नजऱ में
समाज कल्याण विभाग के नोडल अधिकारी मधु तेता ने बताया कि 20, 21 और 22 फरवरी को शबरी ऑडिटोरियम सुकमा में लगे शिविर के माध्यम से सुकमा जिले के कोंटा, छिंदगढ़ और सुकमा विकासखंड के 401 हितग्राहियों का चिन्हांकन कर लाभान्वित किया गया। सुकमा जिले में अब तक कुल 213 दिव्यांग हितग्राहियों का प्रमाण पत्र के लिए आवेदन लिया गया है। हितग्राहियों का ट्राईसिकल, व्हीलचेयर, कृत्रिम हाथ, कृत्रिम पैर, श्रवण यंत्र, छड़ी, स्टिक, बैसाखी आदि मौके पर ही बनाकर प्रदान किया गया। कुछ दिनों के बाद आर्टिफिशियल कैलिपर्स बनाकर हितग्राहियों को वितरित किया जाएगा।
नई सुबह की शुरुआत
समाज कल्याण विभाग की नोडल अधिकारी मधु तेता ने बताया कि शिविर में केवल उपकरण ही नहीं दिए गए, बल्कि दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए उनका प्रमाणीकरण भी किया गया। कैलिपर्स का माप लेकर उन्हें जल्द ही आधुनिक सपोर्ट सिस्टम प्रदान किया जाएगा, ताकि वे दैनिक कार्यों के लिए किसी पर निर्भर न रहें। यह शिविर सुकमा के उन दूरस्थ अंचलों में एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है, जहाँ पहुँचने की राह कठिन थी। अब यहाँ के दिव्यांगजन केवल ‘सहायताÓ के पात्र नहीं, बल्कि ‘स्वावलंबनÓ के प्रतीक बनेंगे। कार्यक्रम में सुकमा जिले के जनप्रतिनिधियों का विशेष सहयोग रहा।
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