सियोल,23 फरवरी। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन को सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी के शीर्ष पद पर अगले 5 साल के लिए फिर से चुना गया है। प्रतिनिधियों ने देश की परमाणु शस्त्रागार को मजबूत करने और क्षेत्रीय स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए किम जोंग की सराहना की है। पार्टी कांग्रेस की रिपोर्ट के अनुसार किम अगले पांच वर्षों के लिए प्रमुख राजनीतिक और सैन्य लक्ष्यों की रूपरेखा तैयार करने के लिए फिर से चुने गए हैं। पार्टी को उम्मीद है कि वह पहले से ही एशियाई अमेरिकी सहयोगियों और अमेरिकी मुख्य भूमि को धमकी देने में सक्षम मिसाइलों से लैस सैन्य परमाणु कार्यक्रम को तेज करने पर जोर देंगे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने किम जोंग को बधाई दी है।
किम जोंग का फोकस परमाणु क्षमता में वृद्धि है। विश्लेषकों का कहना है कि किम संभवत: बैठक का उपयोग नए सैन्य लक्ष्यों को उजागर करने के लिए करेंगे, जिसमें पारंपरिक बलों को मजबूत करना और उन्हें परमाणु क्षमताओं के साथ एकीकृत करना शामिल है, साथ ही महामारी के बाद चीन के साथ व्यापार की रिकवरी और रूस को हथियार निर्यात से प्रेरित धीमी आर्थिक प्रगति के बाद जन जुटाव के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन अभियान पर दोबारा जोर दिया जाएगा। उत्तर कोरिया की आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी ने कहा कि किम को पार्टी के महासचिव के रूप में हजारों प्रतिनिधियों की अटल इच्छा और सर्वसम्मति से रविवार को बैठक के चौथे दिन फिर से चुना गया।
42 वर्षीय किम अपने शासनकाल में पार्टी के शीर्ष पद पर बने रहे हैं। 2016 की कांग्रेस में पदनाम फर्स्ट सेक्रेटरी को बदलकर चेयरमैन कर दिया गया। इसके बाद 2021 की कांग्रेस में इसे महासचिव में बदल दिया गया। पार्टी ने बयान में कहा कि परमाणु बलों का निर्माण करके किम ने ऐसी सेना बनाई है जो आक्रमण की किसी भी धमकी और युद्ध के किसी भी रूप से निपट सकती है। पार्टी ने देश के भविष्य की विश्वसनीय गारंटी देने और उत्तर कोरियाई लोगों के गौरव और आत्मसम्मान को बढ़ाने का श्रेय किम के नेतृत्व को दिया। केसीएनए ने कहा कि कांग्रेस ने रविवार की बैठक में पार्टी नियमों में संशोधन अपनाए लेकिन तुरंत विवरण नहीं दिए। विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई थी कि किम कांग्रेस का उपयोग दक्षिण कोरिया के प्रति अपनी कट्टर नीति को मजबूत करने और संभवत: पार्टी नियमों में संशोधन करके अंतर-कोरियाई संबंधों को दो शत्रुतापूर्ण राज्यों के रूप में वर्णित करने के लिए करेंगे।
किम जोंग और ट्रंप के कार्यकाल में उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच सबसे ज्यादा तनाव है। उत्तर कोरिया ने 2019 में अपने नेता किम और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच शिखर सम्मेलन के विफल होने के बाद अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ सभी सार्थक कूटनीति को निलंबित कर दिया है। इसमें परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को कम करने के कदमों के बदले प्रतिबंधों में राहत पर असहमति थी। किम की सरकार ने ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से बातचीत के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है। किम ने उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग को अमेरिका के साथ बातचीत के पूर्व शर्त के रूप में छोडऩे का आग्रह किया है।
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