राजनांदगांव, 24 फरवरी (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रकाशित व्यंग्य संग्रह ‘झन्नाटा तुंहर द्वार ‘ पर राजनांदगांव जिले के सुरगी में स्थानीय साकेत साहित्य परिषद द्वारा समीक्षा -गोष्ठी आयोजित की गई । यह इस अंचल के सुपरिचित लेखक महेन्द्र कुमार बघेल ‘मधुÓ की छत्तीसगढ़ी व्यंग्य रचनाओं का पहला संग्रह है। गोष्ठी में उपस्थित साहित्यकारों ने इसे बेहतरीन व्यंग्य संग्रह बताया और लेखक को बधाई दी ।
यह आयोजन साकेत साहित्य परिषद की मासिक समीक्षा और काव्य -गोष्ठी के तहत किया गया । छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह के लेखक श्री महेन्द्र बघेल शिवनाथ साहित्य धारा, डोंगरगांव के अध्यक्ष और साकेत साहित्य परिषद सुरगी के वरिष्ठ सदस्य भी हैं । वरिष्ठ साहित्यकार और साकेत साहित्य परिषद के अध्यक्ष ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर ‘ ने आज बताया कि कार्यक्रम दो सत्रों में सम्पन्न हुआ।रविवार 22फरवरी को आयोजित कार्यक्रम में पहला सत्र समीक्षा गोष्ठी का था ।दूसरे सत्र में आंचलिक कवियों की काव्य -गोष्ठी हुई । समीक्षा गोष्ठी में महेन्द्र बघेल के छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह पर आधार वक्तव्य ओमप्रकाश साहू ‘अंकुरÓ ने दिया। उनके साथ -साथ वहाँ उपस्थित सभी साहित्यकारों ने ‘झन्नाटा तुंहर द्वारÓ को एक बेहतरीन व्यंग्य -संग्रह बताया और इसके लिए लेखक श्री बघेल को बधाई दी ।
इस अवसर पर राजनांदगांव की कवयित्री सुषमा शुक्ला को उनकी साहित्यिक सक्रियता को देखते हुए साकेत साहित्य परिषद सुरगी की सदस्यता प्रदान की गई।
समीक्षा गोष्ठी में मुख्य अतिथि डोंगरगांव से आए शिवनाथ साहित्य धारा के पूर्व अध्यक्ष गजेन्द्र हरिहारनो ‘दीप ‘ ने कहा कि ‘झन्नाटा तुंहर द्वारÓ छत्तीसगढ़ी व्यंग्य साहित्य में मील का पत्थर साबित होगा। लेखक महेन्द्र बघेल ने बड़ी बेबाकी से आज की राजनीति और समाज में व्याप्त विभिन्न विसंगतियों पर अपनी धारदार लेखनी से करारा प्रहार किया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नांदगांव साहित्य परिषद के अध्यक्ष,वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि व्यंग्यकार महेन्द्र बघेल ने अपने इस संग्रह की रचनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ी व्यंग्य के क्षेत्र में जोरदार एंट्री की है। उन्होंने अपनी लेखनी से संस्कारधानी राजनांदगांव जिले का नाम रौशन किया है। आयोजन के विशेष अतिथि, प्रगतिशील लेखक संघ, राजनांदगांव के अध्यक्ष प्रभात तिवारी ने कहा कि महेन्द्र बघेल छत्तीसगढ़ी साहित्य की व्यंग्य -विधा में उभरती संभावनाओं के व्यंग्यकार हैं । उम्मीद की जानी चाहिए कि अपने आगामी व्यंग्य संग्रहों में वे और बेहतर कर पायेंगे। समीक्षा गोष्ठी में छत्तीसगढ़ साहित्य समिति, राजनांदगांव के अध्यक्ष अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा ने विशेष अतिथि की आसंदी से अपने वक्तव्य में कहा कि महेन्द्र बघेल ने अपने व्यंग्य संग्रह में सर्वहारा वर्ग की आवाज को बड़ी मुखरता से अभिव्यक्ति दी है। डोंगरगांव से आए विशेष अतिथि,शिवनाथ साहित्य -धारा के पूर्व अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार तिवारी ‘वीरूÓ ने कहा कि ‘झन्नाटा तुंहर द्वारÓ में लेखक महेन्द्र बघेल ने जहां शराब से उत्पन्न हो रही विभिन्न बुराइयों को उजागर किया है, वहीं उन्होंने भ्रष्टाचार, पाखंड, मंहगाई और मिलावटखोरी सहित कई सामाजिक समस्याओं पर भी जम कर व्यंग्य -प्रहार किया है। कार्यक्रम के संयोजक राज कुमार चौधरी ‘रौनाÓ ने कहा कि महेन्द्र कुमार बघेल अपने इस प्रथम व्यंग्य संग्रह के माध्यम से छत्तीसगढ़ी साहित्य की व्यंग्य -विधा में अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल हुए हैं। ओमप्रकाश साहू ‘अंकुरÓ ने कहा कि महेन्द्र बघेल ने अपने पहले व्यंग्य संग्रह के माध्यम से यह साबित कर दिया है कि उनमें बहुत संभावनाएँ हैं। लेखक द्वारा मुहावरों और लोकोक्तियों का सटीक प्रयोग उनके इस व्यंग्य संग्रह को प्रभावी बनाता है, वहीं अंग्रेजी शब्दों के ज्यादा प्रयोग से अतिरेक भी महसूस होता है। अंचल के नवोदित व्यंग्यकार फकीर प्रसाद साहू ‘फक्कड़Ó ने कहा कि छत्तीसगढ़ी व्यंग्यकार महेन्द्र बघेल ने अपने इस व्यंग्य संग्रह में नेताओं के झूठे वादों, दिखावा और बढ़ती मंहगाई पर तीखा व्यंग्य करते हुए समाज में जागरूकता लाने का भरपूर प्रयास किया है।
समीक्षा गोष्ठी में कुतुलबोड़ भांठागांव के वरिष्ठ साहित्यकार
आनंद राम सार्वा, साकेत साहित्य परिषद, सुरगी के पूर्व अध्यक्ष लखन लाल साहू ‘लहरÓ और दिलीप कुमार साहू ‘अमृतÓ सहित नंदकिशोर साव ‘ÓनीरवÓ, कवयित्री सुषमा शुक्ला (राजनांदगांव) और मुकेश कुमार शुक्ला (राजनांदगांव )ने भी विचार व्यक्त किए। सभी वक्ताओं ने ‘झन्नाटा तुंहर द्वार ‘ के लेखक महेन्द्र कुमार बघेल ‘मधु ‘को उनके इस प्रथम व्यंग्य संग्रह के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। समीक्षा गोष्ठी में महेन्द्र बघेल मधु ने आभार प्रदर्शन किया किया।
द्वितीय सत्र में सरस कवि गोष्ठी का दौर चला,जिसमें उपस्थित सभी कवियों ने विभिन्न रसों से ओतप्रोत रचनाएँ पढ़ीं । समीक्षा और कवि गोष्ठी का संचालन ओमप्रकाश साहू ‘अंकुरÓ ने और आभार प्रदर्शन साकेत साहित्य परिषद के सचिव राज कुमार चौधरी ‘रौनाÓ ने किया।
0
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

