हैदराबाद 27 Feb, (Rns) : तेलंगाना सरकार बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी करने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य सरकार आगामी बजट सत्र में एक ऐसा विधेयक पेश करने जा रही है, जिसके तहत माता-पिता की देखभाल न करने वाले कर्मचारियों के वेतन में 10 से 15 प्रतिशत तक की कटौती कर वह राशि सीधे उनके माता-पिता के बैंक खातों में जमा की जाएगी। इस प्रस्ताव की जानकारी स्वयं मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy ने दी।
नव नियुक्त ग्रुप-1 और ग्रुप-2 अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन युवा अधिकारियों को अपने माता-पिता के त्याग और संघर्ष की बदौलत प्रतिष्ठित नौकरियां मिली हैं। ऐसे में उनका दायित्व है कि वे अपने माता-पिता का सम्मान करें और उनकी समुचित देखभाल सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आगामी विधानसभा सत्र में सरकार इस संबंध में ठोस कानूनी प्रावधान लाने जा रही है। उन्होंने कहा, “जो कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल करने में विफल पाए जाएंगे, उनकी सैलरी का 10-15 प्रतिशत हिस्सा काटकर सीधे उनके माता-पिता के खातों में जमा करने की योजना है।”
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों के लिए कार्यकारी शिक्षा (एक्जीक्यूटिव एजुकेशन) की नई पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित MCR HRD Institute और Harvard University के बीच जल्द ही एक समझौता होने वाला है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने MCR HRD संस्थान में आकर प्रशिक्षण देने पर सहमति जता दी है। यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो राज्य स्थापना दिवस (2 जून) से पहले हार्वर्ड के फैकल्टी सदस्य हैदराबाद पहुंच सकते हैं।
अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने हैदराबाद की एक प्रचलित कहावत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अक्सर अधिकारी अपने करियर की शुरुआत में ‘गरम’ (ऊर्जावान) होते हैं, बीच में ‘नरम’ हो जाते हैं और अंत में ‘बेशर्म’ बन जाते हैं। मुख्यमंत्री ने युवा अधिकारियों से अपील की कि वे इस कहावत को गलत साबित करें और अपने पूरे करियर में ईमानदारी, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता बनाए रखें।

