जयपुर 02 March, (Rns) । जलदाय विभाग (PHED) में हालही जारी इंजीनियरों की पोस्टिंग पर न केवल भ्रष्टाचार की जड़ों को उजागर किया है, बल्कि सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए चीफ इंजीनियर (शहरी) मनीष बेनीवाल किसकी मेहरबानी से फील्ड पोस्टिंग में जमे रहे। विभाग में नियुक्तियों का जो ‘नया खेल’ शुरू हुआ है, उसने अधिकारियों के बीच असंतोष और जनता के बीच संशय पैदा कर दिया है। बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जेजेएम (JJM) घोटाले जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद मनीष बेनीवाल पिछले तीन साल से मलाईदार फील्ड पोस्टिंग पर कैसे जमे रहे? उन्हें एपीओ (पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा) करने में विभाग ने तब तक इंतजार किया जब तक कि एसीबी ने उन्हें जेल नहीं भेज दिया। विभाग के गलियारों में अब यह चर्चा आम है कि आखिर वे कौन से ‘आका’ थे जिनकी मेहरबानी बेनीवाल पर बनी हुई थी। विभागीय आदेशों में सीनियारिटी और लॉजिस्टिक्स की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। जयपुर स्थित जल भवन (मुख्यालय) में नीरज माथुर, संदीप शर्मा और आरके मीणा जैसे अनुभवी और वरिष्ठ चीफ इंजीनियर मौजूद हैं, लेकिन उन्हें दरकिनार कर दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि जयपुर शहर जैसे संवेदनशील पद की जिम्मेदारी जोधपुर प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर देवराज सोलंकी को सौंपी गई है। जयपुर से जोधपुर की दूरी 334 किलोमीटर है। भीषण गर्मी की दहलीज पर खड़े राजस्थान में एक ही अधिकारी का इतनी दूर से दो बड़े पदों को संभालना नामुमकिन सा लगता है, जिससे राजधानी की पेयजल व्यवस्था चरमराने का खतरा पैदा हो गया है।
पदोन्नति की कतार में खड़े इंजीनियरों को झटका
पक्षीपात का आलम यह है कि एडिशनल चीफ इंजीनियर (ACE) स्तर पर भी वरिष्ठता को ताक पर रख दिया गया है। भरतपुर प्रोजेक्ट के एसीई सुरेंद्र शर्मा को जयपुर में चीफ इंजीनियर (ग्रामीण) का प्रभार दिया गया है।
जबकि जयपुर में ही तैनात वरिष्ठ एसीई अमिताभ शर्मा, विपिन गुप्ता, अजय सिंह राठौड़ और राज सिंह चौधरी जो पदोन्नति के पात्र हैं, उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।
दूसरी ओर, नितिन जैन और आदित्य शर्मा जैसे अधिकारी एपीओ होने के बावजूद खाली बैठे हैं, उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई।
एसीबी का ‘भूरत्नम’ कनेक्शन पर शिकंजा
रिश्वतकांड की जांच अब और गहरी होती जा रही है। एसीबी ने मैसर्स भूरत्नम कंस्ट्रक्शन कंपनी के टेंडरों से जुड़ी तमाम फाइलें तलब की हैं। सूत्रों के अनुसार, इस कंपनी को अयोग्य होने के बावजूद टेंडर प्रक्रिया में क्वालीफाई कराने के लिए विभाग के बड़े अधिकारियों पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव था। मनीष बेनीवाल और उनके दलाल कजोड़मल तिवाड़ी की गिरफ्तारी के बाद अब कई अन्य बड़े चेहरों पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
अन्य प्रभारों का वितरण : विभाग ने कुछ अन्य बदलाव भी किए हैं जिनमें उदयपुर रीजन के एसीई शैतान सिंह को वहां का चीफ इंजीनियर (प्रोजेक्ट) और मुकेश बंसल को चीफ इंजीनियर (प्रशासन) बनाया गया है। जयपुर रीजन प्रथम के एसीई अजय सिंह राठौड़ अब जयपुर शहर रीजन द्वितीय का जिम्मा भी संभालेंगे।
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