नई दिल्ली ,03 मार्च (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम के तहत पेनल्टी की रकम एम्प्लॉयर को खुद चुकानी पड़ेगी, भले ही मुआवजा इंश्योरेंस से कवर हो। कोर्ट ने कहा कि यह कानून कर्मचारियों की भलाई के लिए बना है, इसलिए इसकी व्याख्या लाभार्थियों के हक में उदार तरीके से होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कई पुराने फैसलों का हवाला देते हुए जोर दिया कि इस कानून को कर्मचारियों के पक्ष में देखना चाहिए। सेक्शन 4्र(3)(ड्ढ) के तहत पेनल्टी की जिम्मेदारी पूरी तरह एम्प्लॉयर पर है। कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट का वह आदेश रद कर दिया। इसमें कहा गया था कि देरी की पेनल्टी इंश्योरेंस कंपनी को चुकानी होगी।
बेंच ने कानून के पीछे के मकसद पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि यह एक सामाजिक कल्याण कानून है, जो संसद ने कर्मचारियों की शिकायतों को दूर करने के लिए बनाया। दुर्घटना होने पर कर्मचारी या उसके परिवार को जल्द से जल्द मुआवजा मिलना चाहिए, ताकि इलाज के खर्चे या परिवार की जीविका चल सके।
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