बीजापुर, 07 मार्च (आरएनएस)। महिला एवं बाल विकास विभाग के निरंतर प्रयासों और सुपोषित बीजापुर के संकल्प ने एक बार फिर एक मासूम की जिंदगी में नई उम्मीद जगा दी है। भोपालपटनम के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती नन्ही त्रिशूल वासम ने दो महीनों के उपचार और देखभाल के बाद गंभीर कुपोषण को मात देकर सामान्य श्रेणी में वापसी कर ली है।
जानकारी के अनुसार, त्रिशूल वासम की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच के दौरान उसकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक पाई गई थी। बच्चे का वजन और ऊंचाई मानक स्तर से काफी कम थी, जिसके कारण उसे अत्यंत गंभीर कुपोषित (स््ररू) श्रेणी में रखा गया था। स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने की सलाह दी गई।
शुरुआत में त्रिशूल के माता-पिता उसे एनआरसी ले जाने के लिए तैयार नहीं थे। उनके मन में कई तरह की आशंकाएं और झिझक थीं। ऐसे समय में महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सुपरवाइजर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कई बार घर जाकर परिजनों की काउंसलिंग की और बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया। लगातार समझाइश और प्रयासों के बाद परिवार अंतत: बच्चे को एनआरसी में भर्ती कराने के लिए राजी हो गया।
एनआरसी में भर्ती होने के बाद त्रिशूल को विशेष पौष्टिक आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। दो महीने तक चले उपचार और देखभाल के सकारात्मक परिणाम सामने आए और धीरे-धीरे बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार होने लगा।
अब त्रिशूल पूरी तरह स्वस्थ है और उसके वजन व ऊंचाई में संतोषजनक वृद्धि दर्ज की गई है। चिकित्सकों के अनुसार बच्चा अब गंभीर कुपोषण के दायरे से बाहर आ चुका है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जब माता-पिता शुरू में तैयार नहीं थे, तब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के धैर्य और समर्पण ने ही यह सफलता संभव बनाई। आज त्रिशूल को स्वस्थ देखकर यह साबित होता है कि सही समय पर सही उपचार और पोषण किसी भी बच्चे का भविष्य बदल सकता है।
यह उपलब्धि केवल एक बच्चे के स्वस्थ होने की कहानी नहीं है, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मेहनत और महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यकुशलता का प्रमाण भी है। त्रिशूल की यह रिकवरी भोपालपटनम क्षेत्र के अन्य परिवारों के लिए भी प्रेरणा बन रही है, जिससे लोग कुपोषण के खिलाफ इस अभियान में प्रशासन का साथ देने के लिए आगे आ रहे
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